भिक्षा, दहीभाई, भयंकर जैसे नामों से किरकिरी पर शिक्षा विभाग को आई अक्ल, वापस लिया आदेश

कौन चाहेगा कि उसके बच्चे का नाम जब स्कूल में पुकारा जाए तो उसे गर्व नहीं बल्कि शर्म महसूस हो। जी हां, क्योंकि यही अहसास कराने के लिए राजस्थान के शिक्षा विभाग में स्कूलों में बच्चों के अजीबो-गरीब नाम रखे थे जो विभाग के सार्थक नाम अभियान का हिस्सा था। लेकिन अब शिक्षा विभाग ने इस फैसले को वापस ले लिया है।
कांग्रेस समेत भीम आर्मी, अभिभावक संघ ने जताया था विरोध
शिक्षा विभाग के नाम बदलने के इस अभियान से पूरे राजस्थान में चौतरफा आलोचना हो रही थी। कांग्रेस समेत भीम आर्मी ने भी इस फैसले का पुरजोर विरोध किया था कि शिक्षा विभाग बच्चों को गर्व महसूस कराने वाले नाम दे रहा है या शर्मशार करने वाले। इसके अलावा संयुक्त अभिभावक संघ ने भी कहा था कि बच्चों के नाम बदलने या रखने का अधिकार सिर्फ उनके माता-पिता को है ना कि स्कूल या शिक्षा विभाग का।
क्या जरूरत पड़ी नाम बदलने की?
दरअसल शिक्षा विभाग ने उन बच्चों के नाम बदलने के लिए सार्थक अभियान की शुरुआत की थी जिनका नाम निरर्थक हैं, अजीबो-गरीब हैं या फिर अपमानजनक हैं। जिससे बच्चों को अपना नाम पुकारने पर या बताने में शर्म ना महसूस हो। इसके लिए शिक्षा विभाग ने 1409 लड़कों और 1529 लड़कियों के नामों की लिस्ट निकाली थी।
बच्चों के नामों की ये लिस्ट तब विवादों में आ गई जब इसके अटपटे और अपमानजनक नाम सामने आए। जैसे लड़कों के नाम बेचारदास, मक्खनसिंह, अहंकार, दहीभाई, दगडूराम रखे गए तो वहीं लड़कियों के रजनीगंधा, ऊर्जा, भिक्षा, प्राप्ति जैसे नाम सुझाए गए थे। इतना ही नहीं कुछ लड़कों के तो लड़कियों वाले नाम रखे गए और लड़कियों के लड़कों वाले। और तो और कुछ नाम तो ऐसे थे तो इतने ज्यादा अटपटे थे कि उन्हें तो किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
क्या कहा शिक्षा मंत्री ने?
सार्थक नाम अभियान की आलोचनाओं पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सफाई देते हुए कहा था कि इस अभियान का मकसद बच्चों के अच्छे नाम रखना है। हालांकि ये फाइनल लिस्ट नहीं है ये तो ड्राफ्ट भर है। माता-पिता इस लिस्ट में से अपने बच्चे का नाम रख सकते हैं। लेकिन लिस्ट में अगर कहीं गड़बड़ी है तो उसे तुरंत ठीक कराया जाएगा।
कांग्रेस ने कहा सरकार नाम बदलने में ही उलझी
शिक्षा विभाग के इस कारनामे पर कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा था। कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा था कि विभाग को चाहिए कि स्कूलों की दयनीय हालत को सुधारा जाए। जर्जर इमारतों को ठीक किया जाए, वहां बाथरूम-टॉयलेट बनवाया जाए, बिजली-पानी की व्यवस्था की जाए, वहां पर बच्चों के नामांकन बढ़ाए जाएं लेकिन विभाग को नाम बदलने में ही उलझा हुआ है।
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