राजस्थान पंचायत चुनाव: 30 करोड़ रुपए का पंचायती ‘खेल’? चुनाव हुए ही नहीं, और बहा दिया सारा पैसा

राजस्थान पंचायत चुनाव: 30 करोड़ रुपए का पंचायती ‘खेल’? चुनाव हुए ही नहीं, और बहा दिया सारा पैसा
राजस्थान
13 Apr 2026, 10:30 am
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Rajasthan Panchayat Elections 2026: राजस्थान में पंचायत चुनाव के नाम पर राज्य निर्वाचन आयोग ने 30 करोड़ खर्च कर डाले। ये 15 अप्रैल तक होने थे लेकिन चुनाव तो हुए नहीं। अब सवाल उठ रहा है कि सवाल ये है कि सरकार को तय समय पर चुनाव नहीं कराने थे तो चुनाव आयोग को इतनी बड़ी रकम खर्च क्यों करने दी? लोगों ने वोट डाले भी नहीं और खर्च पूरा हो गया। सरकार चाहती तो इसे रोक सकती थी। अब नतीजा ये हुआ है कि चुनाव आयोग का गोदाम EVM से लेकर स्याही और कागज से भरा पड़ा है। जो अब किसी काम का नहीं है इसमें से सिर्फ कागज की काम आएंगे।

चुनाव तक को भाप बनकर उड़ेगी या जमेगी स्याही!

राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने पहली बार निजी कंपनी कोरस से अमिट स्याही खरीदी थी। वही स्याही जो चुनाव डालने से पहले आपकी उंगली पर लगाई जाती है। इस स्याही की कीमत 5 करोड़ 90 लाख की थी। वैसे कंपनी कहती है कि ये स्याही 12 महीने चलेगी। जबकि सरकारी स्याही सिर्फ 6 महीने की गारंटी में आती है। अब समस्या ये है कि इस तरह की स्याही भाप बनकर उड़ने या जमने लगती है। दूसरी तरफ पंचायत चुनाव तो 6–7 महीने दूर ही दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में स्याही चुनाव तक को आधी ही रह जाएगी।

EVM पर 7.5 करोड़ रुपए खर्च

इतना ही नहीं आयोग ने पड़ोसी राज्यों से EVM मंगाने में 3 करोड़ रुपए का तो किराया लगाया है। अब जब चुनाव नहीं हो रहे हैं तो उन्हें वापस भेजने पर फिर इतना ही खर्च करना पड़ेगा। ऊपर से ढाई करोड़ रुपए की अमानत राशि भी जमा कराई गई थी।

इस हिसाब से ये खर्च 7.5 करोड़ रुपए का बैठ रहा है। EVM और स्याही के अलाव आयोग ने 3 करोड़ रुपए के कागज, ट्रेनिंग और स्टाफ तैयारी के 5 से 6 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। इधर आयोग ये कह रहा है कि कागज तो काम ही आ जाएगा लेकिन ट्रेनिंग, चुनाव के इंतजाम, चुनाव की तैयारी सब दोबारा करनी पड़ेगी। यानी इतना ही पैसा फिर से खर्च होगा।

सवाल उठ रहा कि राज्य सरकार ने OBC आयोग का कार्यकाल बढ़ाकर साफ कर दिया था कि आने वाले 7–8 महीनों तक कोई चुनाव होने की उम्मीद नहीं है तो फिर इतनी खरीदारी क्यों कराई?

30 करोड़ रुपए के खर्च पर चुनाव आयोग ने क्या कहा?

इस 30 करोड़ रुपए के खर्च के सवालों का जवाब सचिव राजेश वर्मा ने दिया है। जिसमें उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल तक चुनाव के निर्देश दिए थे इसलिए तेजी से तैयारी की गई। वहीं लंबे समय तक स्याही के खराब होने के सवाल पर उन्होंने कह दिया कि अगर स्याही खराब निकल गई तो कंपनी पर FIR कर देंगे और EVM के सवाल पर कहा कि वो तो लौटानी ही होगी और भुगतान करना तो अनिवार्य है।

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