रावणा-भाटी विवाद में क्या जाएगी रविंद्र सिंह भाटी की विधायकी, क्या कहता है कानून

Bhati and Rawana controversy: शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और भजन गायक छोटू सिंह रावणा के विवाद ने अब विशाल रूप ले लिया है। छोटू सिंह ने विधायक भाटी समेत अन्य 4-5 लोगों के खिलाफ 2 अप्रैल 2026 को बाड़मेर जिले के शिव पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। जिसमें छोटू सिंह (Chhotu Singh Rawana) ने विधायक भाटी पर अनेक गंभीर आरोप लगाए है अब इस FIR की जांच CID-CB करेगी।
रावणा ने भाटी पर लगाए ये आरोप
छोटू सिंह ने विधायक भाटी (Ravindra Singh Bhati) पर लिखित शिकायत में लगाए गए आरोपों में जान से मारने की धमकी, मान मर्यादा और प्रतिष्ठा को धूमिल करने और सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणी जैसे आरोप लगाए हैं। अगर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी पर छोटू सिंह के लगाए गए आरोप जांच में सही साबित हो जाते हैं तो विधायक भाटी की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
आइए जानते हैं अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो विधायक भाटी (Ravindra Singh Bhati) पर कानूनी रूप से क्या-क्या कानूनी कार्यवाही हो सकती है।
1-जान से मारने की धमकी (Death Threat/Criminal Intimidation)
ये आरोप भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 351(3) के अंतर्गत आता है। आरोपी पर इस अपराध में अपराध की गंभीरता के अनुसार अधिकतम 7 वर्ष का कारावास/जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
2-मान मर्यादा एवं प्रतिष्ठा को धूमिल करना (मानहानि/Defamation)
ये आरोप भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 356 के अंतर्गत आता है। ये एक गैर-संज्ञेय (जमानती) अपराध है। इस प्रावधान में आरोपी के इरादे और उसकी मंशा की गंभीरता के अनुसार आरोपी पर अधिकतम 2 वर्ष का कारावास जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
3-सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना
ये आरोप भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 356 और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 की धारा 66A के अंतर्गत है लेकिन वर्तमान में IT अधिनियम, 2000 के 66A को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015) मामले में इसे असंवैधानिक और रद्द घोषित किया हुआ है।
विधायक भाटी पर छोटू सिंह के लगाए गए आरोप और कानूनी प्रावधानों को देखते हुए अगर ये आरोप जांच में सही साबित हो जाते हैं और वे अपराध में दोषी ठहराए जाते हैं और उन पर 2 वर्ष या उससे अधिक वर्ष की कानूनी सजा होती है तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Reprensentation of the People Act) 1951, की धारा 8 (3) के अनुसार उनकी राजस्थान विधानसभा की सदस्यता (सजा होने के तत्काल प्रभाव) से रद्द मानी जाएगी।
कंटेंट एंड रिसर्च- एडवोकेट प्रत्युष तिवाड़ी, कानूनी विशेषज्ञ
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