इस तस्वीर के साथ सचिन पायलट ने दी अशोक गहलोत को जन्मदिन की शुभकामनाएं, मंच के जादू से सियासत की जादूगरी का सफर

इस तस्वीर के साथ सचिन पायलट ने दी अशोक गहलोत को जन्मदिन की शुभकामनाएं, मंच के जादू से सियासत की जादूगरी का सफर
राजस्थान
03 May 2026, 12:06 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

आज कांग्रेस के दिग्गज नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जन्मदिन है। सुबह से ही उनके समर्थक और कई सियासी नेता उन्हें शुभकामनाएं भेज रहे हैं, उनकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है सचिन पायलट के उस पोस्ट की जिसमें उन्होंने अपनी और गहलोत की फोटो पोस्ट की है।

क्या लिखा है इस पोस्ट में?

सचिन पायलट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने अकाउंट से पोस्ट करते हुए लिखा कि “राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मैं ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य, खुशहाल एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।“

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
मैं ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य, खुशहाल एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।@ashokgehlot51 pic.twitter.com/ox0DKkhHGI
— Sachin Pilot (@SachinPilot) May 3, 2026

मंच के जादू से सियासत के जादूगर तक

3 मई 1951 को जोधपुर के लक्ष्मण सिंह गहलोत के घर एक बालक ने जन्म लिया। पिता मशहूर जादूगर थे, पर बेटा डॉक्टर बनना चाहता था। उन्होंने इसके लिए PMT परीक्षा दी, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 1971 के बांग्लादेश शरणार्थी संकट के दौरान गहलोत कैंपों में सेवा कर रहे थे। वहीं इंदिरा गांधी की नज़र उन पर पड़ी। उन्होंने इस नौजवान के भीतर की सादगी और मेहनत को पहचाना और यहीं से शुरू हुआ जोधपुर के लड़के का दिल्ली का सफर।

गहलोत की सादगी के किस्से आज भी मशहूर हैं। 1980 में पहली बार जोधपुर से सांसद बने कहा जाता है कि जब वो इंदिरा गांधी की कैबिनेट में राज्य मंत्री के तौर पर शपथ लेने जा रहे थे, तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें राष्ट्रपति भवन के गेट पर रोक दिया था क्योंकि वो ऑटोरिक्शा से आए थे। इसके बाद राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में भी उन्होंने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। लेकिन असली 'जादू' अभी राजस्थान में होना बाकी था।

1998 में पहली बार बने मुख्यमंत्री

1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2008 हो या 2018, जब-जब कांग्रेस को राजस्थान में संकटमोचक की जरूरत पड़ी, जादूगर ने अपनी छड़ी घुमाई है। 2020 में मानेसर कांड के दौरान जब पूरे देश को ये लग रहा था कि अब गहलोत सरकार गिर जाएगी तब उन्होंने यही जादू दिखाया और असंभव सा लगने वाला संभव कर दिया और अपनी सरकार बचा ली।

गहलोत की जादूगरी और सियासत कांग्रेस के आलाकमान को इतनी प्रभावित करती है कि 2022 में तो सोनिया गांधी समेत समूची कांग्रेस ने अशोक गहलोत को अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया था सिर्फ इसकी औपचारिकता ही पूरी होनी थी लेकिन गहलोत के ही चाहने वालों ने उन्हें राजस्थान छोड़ने नहीं दिया और अस्तित्व में 25 सितंबर 2022 का घटनाक्रम आया। जो राजस्थान के सियासी इतिहास में दर्ज हो चुका है।

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