परिवहन विभाग में 6 निरीक्षकों की पोस्टिंग को लेकर आयुक्त और शासन सचिव में टकराव, 21 दिन में जारी हुए 4 आदेश, जानें पूरा मामला

Rajasthan Transport Department Posting Controversy: परिवहन विभाग में अब अफसरों की लड़ाई अब सड़क पर आ गई है। परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने एपीओ चल रहे 6 निरीक्षकों को खाली पदों पर पोस्टिंग दे दी। इसके बाद अगले ही दिन परिवहन शासन सचिव भवानी सिंह देथा ने रूल्स ऑफ बिजनेस की पालना नहीं होने का हवाला देते हुए आदेश को निरस्त कर दिया। यह पूरा मामला 25 मई का है जब परिवहन आयुक्त ने एपीओ किए गए निरीक्षकों को पोस्टिंग दी। इसके बाद अगले ही दिन यानी 26 मई को शासन सचिव ने यह नियुक्तियां रद्द कर दी।
ऐसे में अब सिलेसिलेवार तरीके से समझते है। सबसे पहले परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने एक आदेश के जरिए 6 एपीओ किए गए निरीक्षकों को पोस्टिंग दी। इनमें महेश पारीक को आरटीओ प्रथम, पुष्पेंद्र भारद्वाज को डूंगरपुर, रामचंद्र को पोकरण, नवल मीणा को जयपुर प्रथम, गौतम मिश्रा को बांसवाड़ा, प्रमोद चौधरी को झालावाड़ में पोस्टिंग दे दी। इस आदेश के बाद महेश कुमार और नवल मीणा ने तो अगले ही दिन ड्यूटी जाॅइन भी कर ली। लेकिन शाम होते-होते शासन सचिव भवानी सिंह देथा ने आदेश जारी कर सभी 6 अधिकारियों की पोस्टिंग रद्द कर दी।
परिवहन आयुक्त का आदेश क्यों हुआ रद्द
इस पूरे मामले को लेकर आयुक्त कार्यालय ने कहा कि राजस्थान सेवा नियम 1951 और संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत विभाग के अध्यक्ष को नियुक्ति व पदस्थापन का अधिकार है। जबकि सचिवालय ने तर्क दिया कि इस मामले में रूल्स ऑफ बिजनेस की पालना नहीं हुई। संविधान के जानकारों की मानें तो रूल्स ऑफ बिजनेस सचिवालय की कार्यप्रणाली के लिए होते हैं। ऐसे में आयुक्त द्वारा की गई पोस्टिंग उनके अधिकार क्षेत्र में आता है।
6 में 4 निरीक्षकों को मिली नई पोस्टिंग
इस मामले को लेकर एक और बात सामने आई है। पहले 21 दिनों तक 6 निरीक्षकों की पोस्टिंग को लेकर 4 अलग-अलग आदेश जारी हुए। शासन सचिव की ओर से आदेश निरस्त होने के बाद फाइल करीब 10 दिन तक सचिवालय में लंबित रही। इसके बाद 12 जून को नया आदेश जारी किया गया। इसमें प्रमोद चैधरी को जोधपुर, गौतम मिश्रा को सादुलशहर, पुष्पेंद्र भारद्वाज को जयपुर द्वितीय और रामचंद्र का कोटा में नई पोस्टिंग दी गई। जबकि नवल मीणा और महेश पारीक को अभी कहीं पर भी पोस्टिंग नहीं दी गई है।
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