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‘इंदिरा गांधी ने दे दी थी ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी’, गहलोत बोले ध्यान नहीं दे रही आज की सरकारें

‘इंदिरा गांधी ने दे दी थी ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी’, गहलोत बोले ध्यान नहीं दे रही आज की सरकारें
जयपुर
05 Jun 2026, 05:26 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Ashok Gehlot: विश्व पर्यावरण दिवस पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को काफी कुछ कहा। उन्होंने राजस्थान से लेकर देश और दुनिया में बदहाल होते पर्यावरणीय स्थितियों पर अपनी चिंता जताई। जयपुर में उन्होंने कहा कि पहले मौसम बदलता है अब बिगड़ता है, य़े पर्यावरण का जो संतुलन बिगड़ रहा है, प्रदूषण हो रहा है, ये गंभीर है। सबसे पहले इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने पूरी दुनिया की खींचा था कि किस तरह हमें पर्यावरण पर ध्यान देना होगा कि आने वाले समय में पूरी दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग होगी। आज वही स्थिति बन गई। दुनिया के मुल्कों में ग्रीन पार्टी बन गई और पॉलिटिकल पार्टी के रूप में बनना बड़ी बात है। मैंने बहुत पहले कहा था कि पानी बचाओ, बिजली बचाओ, सबको पढ़ाओ। फिर मैंने जोड़ा उसके अंदर पानी बचाओ, बिजली बचाओ, सबको पढ़ाओ, वृक्ष लगाओ और बेटी बचाओ।

राहुल गांधी ने उठाया अंडमान निकोबार का मुद्दा

गहलोत ने कहा कि ये पांचों बातें आज भी मौजूद हैं। पेड़ों की कमी से जो हालात बने हैं, पेड़ काटे जा रहे हैं। अंडमान निकोबार का जो राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मुद्दा उठाया है, उस पर भारत सरकार को ध्यान देना चाहिए बहुत ही गंभीरता से। राहुल गांधी ने जाकर के वहां पर पूरी तरह जांच पड़ताल करके, पूरी बात समझ करके उसके बाद में इसको मुद्दा बनाया है।

गहलोत ने आगे कहा कि अंडमान निकोबार हमारे मुल्क का सबसे खूबसूरत एक द्वीप है। वो नष्ट हो जाएगा आने वाले वक्त के अंदर। उसके अभाव में पता नहीं क्या होगा आने वाले वक्त के अंदर। बद्रीनाथ, केदारनाथ में क्या-क्या नहीं हुआ है? अनेकों परिवार के लोग वहां बह गए थे। वो भी हिंदुस्तान के लोग गवाह हैं उसका, किस प्रकार से वहां पर स्थिति बदली थी।

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'हर कोई लगाए पेड़ और उनकी करे रक्षा'

गहलोत बोले कि मैं आह्वान करूंगा लोगों को भी आगे आएं पेड़ लगाने के लिए। हम चाहेंगे कि एक अपील करें लोगों से, किस प्रकार से वृक्षों का क्या उपयोग है। हर व्यक्ति, हर परिवार ये संकल्प करना चाहिए कि घर के अंदर जगह है तो वहां पर भी, घर के आस-पास है वहां पर भी, या जहां वो क्षेत्र चुने स्कूल हो, कॉलेज हो, पर पेड़ लगाएं, साथ ही पेड़ों की रक्षा भी करें।

राजस्थान ने तो सदियों से यहां अकाल जैसे हालात झेले हैं। किस तरह सरकारों ने अकाल राहत के काम खोले हैं, लोगों को बचाए रखा है, उनको जिंदा रखा है। कितनी तकलीफ झेली होगी, पश्चिमी राजस्थान के लोग ही ज्यादा जानते हैं। गहलोत ने कहा कि क्योंकि बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, फलोदी, बाप, शेरगढ़ हो चाहे वो ओसियां हो चाहे भोपालगढ़ या बिलाड़ा कोई हो। पूरा मारवाड़ जो है पाली, जालौर, सिरोही सबमें जो तकलीफ आती ही आती है और वैसे राजस्थान भर में अकाल में चाहे वो आपके दक्षिण राजस्थान हो, डूंगरपुर, बांसवाड़ा के अंदर तकलीफ पाते थे।

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