'कौन डोटासरा?'…सीकर के टोल पर जब पीसीसी चीफ की गाड़ी अटकी, तो मच गया बवाल

Govind Singh Dotasra: राजस्थान की राजनीति में एक से बढ़कर एक तल्ख तेवर देखने को मिलते हैं, लेकिन सीकर के अखैपुरा टोल प्लाजा पर जो हुआ, उसने सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक का पारा चढ़ा दिया। मामला किसी भाषण का नहीं, बल्कि एक सीधे से सवाल का था— "कौन डोटासरा?"
दरअसल बीते शुक्रवार सुबह करीब 8:55 बजे राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की गाड़ी टोल की 11 नंबर लेन में पहुंची। बूम नहीं हटा तो ड्राइवर ने रौब से कहा, "अरे भाई, गाड़ी में डोटासरा साहब बैठे हैं" टोलकर्मी ने भी बिना झिझके तपाक से कह दिया, "कौन डोटासरा? टोल तो लगेगा"
जिस नेता के तेवर से पूरा अमला वाकिफ हो और जिनका गमछा डांस सिस्टम हिला देता हो, उनके ही गृह जिले में अगर कोई ये पूछ ले, तो गुस्सा आना लाजिमी था। डोटासरा गाड़ी से उतरे, नाराजगी जताई और सीधे एसपी को फोन घुमाकर टोल की 'दादागिरी' की शिकायत ठोक दी। फिर क्या था, पुलिस दौड़ी आई और दो टोलकर्मियों को हिरासत में ले लिया। टोल मैनेजर सफाई देता रह गया कि डोटासरा दूसरी गाड़ी में थे, इसलिए कर्मचारी पहचान नहीं पाया।
क्या कहते हैं नियम?
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोग डोटासरा को ही कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों पर पुलिसिया कार्रवाई करवाना सरासर वीआईपी कल्चर का रौब झाड़ना है। अब सवाल यही उठता है कि क्या नेताओं का टोल नहीं लगता? तो बता दें कि राष्ट्रीय राजमार्ग के नियमों के तहत मौजूदा विधायकों और सांसदों को टोल टैक्स से छूट मिलती है। ये छूट तभी मिलती है जब गाड़ी पर अधिकृत फास्टैग हो या विधायक अपना सरकारी पहचान पत्र (ID Card) दिखाए। अगर विधायक किसी नई या बिना पास वाली गाड़ी में हैं, तो टोलकर्मी को पहचान पत्र मांग सकता है।
इस पूरे वाकये ने एक बार फिर नेताओं के VIP कल्चर और आम कर्मचारियों की मजबूरी के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। बहस इस बात छिड़ गई है कि एक तरफ जहां नेता अपनी पहचान और रसूख के सामने सवाल बर्दाश्त नहीं कर पाए, वहीं दूसरी तरफ सिर्फ नियम का पालन करने की सजा दो कर्मचारियों को हिरासत में जाकर चुकानी पड़ी।
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