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जयपुर अग्निकांड के अगले दिन पुरोहित जी के कटले पहुंचे गहलोत, दुकानदारों ने सुनाया दर्द

जयपुर अग्निकांड के अगले दिन पुरोहित जी के कटले पहुंचे गहलोत, दुकानदारों ने सुनाया दर्द
राजस्थान
18 Sept 2026, 06:21 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Jaipur Tripolia Bazar Fire Incident: राजधानी जयपुर के त्रिपोलिया बाजार स्थित पुरोहित जी के कटले के सेठी कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग के एक दिन बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुक्रवार को घटनास्थल पर पहुंचे। गहलोत ने आग से प्रभावित दुकानदारों और व्यापारियों से मुलाकात की, उनके नुकसान की जानकारी ली और मौके के हालात का जायजा लिया।

गुरुवार सुबह करीब 7 बजे लगी इस आग ने करीब 25 दुकानों और गोदामों को अपनी चपेट में ले लिया था। कपड़े, चूड़ी, प्लास्टिक और कॉस्मेटिक सामान समेत बड़ी मात्रा में माल जलकर राख हो गया। व्यापारियों के मुताबिक नुकसान करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है।

गहलोत से क्या बोले दुकानदार

घटनास्थल पर पहुंचे गहलोत से व्यापारियों ने अपनी परेशानियां साझा कीं। दुकानदारों ने बताया कि दीपावली का सीजन सामने होने के कारण उन्होंने बड़ी मात्रा में नया माल मंगवाया था, लेकिन आग में कुछ ही घंटों में उनका पूरा स्टॉक जल गया।

व्यापारियों ने गहलोत को बताया कि कॉम्प्लेक्स में फायर सेफ्टी सिस्टम लगा हुआ था, लेकिन जरूरत के वक्त वह प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पाया। व्यापारियों का आरोप है कि फायर हाइड्रेंट, स्मोक डिटेक्टर और अन्य सुरक्षा उपकरण लंबे समय से ठीक तरह से काम नहीं कर रहे थे।

पुरोहित जी का कटला ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल पिटलीया ने भी बताया कि बाजार में 14 फायर हाइड्रेंट लगाए गए थे, लेकिन व्यापारियों के मुताबिक उनका इस्तेमाल कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर आग दिन में बाजार खुलने के बाद लगती तो जान-माल का नुकसान और ज्यादा हो सकता था।

व्यापारियों ने ये भी बताया कि बाजार की संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई। आग बुझाने के दौरान दमकल की पानी की आपूर्ति भी कुछ समय बाधित होने की बात सामने आई है।

गहलोत ने कहा- फायर NOC की जांच हो

दुकानदारों की बात सुनने के बाद गहलोत ने कहा कि इस हादसे ने परकोटे में अग्निसुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने मांग की कि परकोटे में मौजूद व्यावसायिक इमारतों की फायर NOC और फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच कराई जाए। जिन जगहों पर फायर उपकरण बंद या खराब पाए जाएं, वहां तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।

गहलोत ने कहा कि राहत और बचाव कार्य में दमकल, सिविल डिफेंस और NDRF के कर्मचारियों ने अच्छा काम किया। उन्होंने कहा कि समय पर राहत कार्य होने और बाजार सुबह के समय बंद होने के कारण बड़ा जनहानि वाला हादसा टल गया।

'सरकार का कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौके पर नहीं पहुंचा'

गहलोत ने राज्य सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आग में व्यापारियों का करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया, लेकिन सरकार की ओर से कोई जिम्मेदार मंत्री या प्रतिनिधि प्रभावित व्यापारियों का हाल जानने मौके पर नहीं पहुंचा।

गहलोत ने सरकार से मांग की कि प्रभावित दुकानदारों के नुकसान का तत्काल सर्वे करवाकर पीड़ितों को उचित आर्थिक मदद दी जाए।

उन्होंने कहा कि हादसे के बाद केवल जांच की बात करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि यह भी तय होना चाहिए कि जिस फायर सेफ्टी सिस्टम पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, वह आग लगने के समय प्रभावी क्यों नहीं था।

3.90 करोड़ के फायर हाइड्रेंट सिस्टम पर भी सवाल

इस अग्निकांड के बाद जयपुर के परकोटे में लगाए गए फायर हाइड्रेंट सिस्टम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 3.90 करोड़ रुपये की लागत से यह सिस्टम लगाया गया था, जिसका उद्देश्य संकरी गलियों में दमकल की गाड़ियों के पहुंचने में परेशानी होने पर पाइपलाइन और हाइड्रेंट के जरिए पानी उपलब्ध कराना था।

लेकिन आग के दौरान व्यापारियों की तरफ से इस सिस्टम के प्रभावी नहीं होने की शिकायत सामने आई। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि सिस्टम की नियमित जांच और रखरखाव किस स्तर पर हुआ।

कैसे लगी थी आग?

प्रारंभिक पुलिस जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट होने की आशंका जताई गई है। आग सेठी कॉम्प्लेक्स में चूड़ी के गोदाम से शुरू होने की बात सामने आई थी और देखते ही देखते कपड़े, प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और दूसरे ज्वलनशील सामान के कारण आग फैल गई।

करीब 30 दमकल गाड़ियों और 50-60 दमकलकर्मियों की मदद से घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। संकरी गलियों और वेंटिलेशन की कमी के कारण राहत कार्य मुश्किल रहा।

पुलिस ने सेठी कॉम्पलेक्स के मालिक आनंद सेठी के खिलाफ दर्ज किया केस

आग के बाद पुलिस ने सेठी कॉम्प्लेक्स के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसमें कथित अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों में लापरवाही और फायर NOC से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।

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