चुनाव हार गए तो सरकारी नौकरी में वापस नहीं लौट सकते? राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, इस्तीफे को लेकर कही अहम बात

जयपुर: सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में उतरने और चुनाव लड़ने वाले कर्मचारियों के लिए राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ चुनाव हार जाने के आधार पर कोई सरकारी कर्मचारी अपना इस्तीफा वापस लेकर पुरानी सरकारी सेवा में बहाली का अधिकार नहीं मांग सकता। अदालत ने चुनाव लड़ने के लिए दिया गया इस्तीफा कर्मचारी का स्वैच्छिक फैसला माना और कहा कि चुनाव में हार को इस्तीफा देने के समय मौजूद परिस्थितियों में ऐसा बदलाव नहीं माना जा सकता, जिससे नौकरी में वापसी का अधिकार पैदा हो।
ये फैसला 12 सितंबर 2026 को जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने दिया। कोर्ट ने पूर्व सीनियर ऑडिटर नीरज बिश्नोई की याचिका खारिज कर दी। बिश्नोई नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के ऑडिट विभाग में कार्यरत थे और उन्होंने 2023 में राजस्थान विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए नौकरी से इस्तीफा दिया था।
क्या था पूरा मामला?
नीरज बिश्नोई नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के ऑडिट विभाग में सीनियर ऑडिटर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 10 अक्टूबर 2023 को इस्तीफा दिया, क्योंकि वो राजस्थान विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे। विभाग ने उनका इस्तीफा 1 नवंबर 2023 को स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने रतनगढ़ विधानसभा सीट से BSP के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन चुनाव हार गए।
चुनाव हारने के बाद बिश्नोई ने 1 जनवरी 2024 को अपना इस्तीफा वापस लेने और सेवा में बहाल करने की मांग की। विभाग ने उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद उन्होंने CAT (केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण) का रुख किया और वहां से राहत नहीं मिलने पर राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने इस्तीफा वापस लेने की मांग क्यों ठुकराई?
मामले में CCS (Pension) Rules, 2021 के Rule 26(5) अहम रहे। इस नियम के तहत इस्तीफा वापस लेने के लिए कुछ विशेष परिस्थितियों में अनुमति दी जा सकती है, जिसमें इस्तीफा देने के बाद परिस्थितियों में ऐसा अहम बदलाव होना शामिल है, जो इस्तीफा वापस लेने को उचित ठहराए।
लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव लड़ना कर्मचारी की अपनी स्वैच्छिक पसंद थी। इसलिए चुनाव हार जाना उस समय मौजूद परिस्थितियों में ऐसा बाध्यकारी नहीं है, जिसके आधार पर इस्तीफा वापस लेने का अधिकार मिल जाए।
कोर्ट ने साफ तौर पर माना कि जब कर्मचारी ने चुनाव लड़ने के लिए नौकरी छोड़ी, तब उसे पता था कि चुनाव का नतीजा उसके पक्ष में भी हो सकता है और विपक्ष में भी। इसलिए बाद में हार जाने को इस्तीफा वापस लेने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
चुनाव हारने के बाद नौकरी में वापसी का रास्ता बंद
कोर्ट के मुताबिक कोई कर्मचारी ये मानकर इस्तीफा नहीं दे सकता कि अगर चुनाव जीत गया तो राजनीति में रहेगा और अगर हार गया तो इस्तीफा वापस लेकर सरकारी नौकरी में लौट आएगा। अदालत ने चुनाव लड़ने के फैसले को कर्मचारी की स्वैच्छिक पसंद माना है।
राजनीतिक दल के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना भी बना अहम मुद्दा
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया। CAT ने ये भी माना था कि राजनीतिक दल के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ना सरकारी कर्मचारी की राजनीतिक निष्पक्षता बनाए रखने की शर्त से जुड़ा मुद्दा है। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के इस निष्कर्ष में भी कोई कानूनी गलती नहीं पाई।
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