Ex MLA बलजीत यादव की जेल में भूख हड़ताल, FIR को बताया ‘बेबुनियाद’

जयपुर सेंट्रल जेल में बंद बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। मोबाइल बरामदगी के मामले में दर्ज FIR को उन्होंने बेबुनियाद बताते हुए इसे अपने खिलाफ गलत कार्रवाई करार दिया है। यादव ने इस मामले को लेकर राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र भी लिखा है।
जयपुर सेंट्रल जेल में बंद बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव ने अब जेल के भीतर से ही मोर्चा खोल दिया है। मोबाइल फोन बरामदगी के मामले में अपने खिलाफ दर्ज FIR को गलत और बेबुनियाद बताते हुए यादव शनिवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। उन्होंने अपनी शिकायत और पक्ष रखते हुए DGP को पत्र भी भेजा है। यादव की भूख हड़ताल ऐसे समय शुरू हुई है, जब दो दिन पहले जयपुर सेंट्रल जेल में तलाशी के दौरान उनके पास से मोबाइल फोन, बैटरी और सिम कार्ड मिलने का दावा जेल प्रशासन ने किया था। इस बरामदगी के बाद लालकोठी थाने में उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था।
क्या है मोबाइल बरामदगी का पूरा मामला?
जेल प्रशासन के मुताबिक 9 सितंबर को जयपुर सेंट्रल जेल के वार्ड नंबर-5 में तलाशी अभियान चलाया गया था। तलाशी के दौरान बलजीत यादव के पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। रिपोर्टों में दावा है कि फोन को कंबल के नीचे छिपाकर रखा गया था। मोबाइल के साथ उसकी बैटरी और सिम भी मिली।
जेल प्रहरी विष्णु की शिकायत पर लालकोठी थाने में मामला दर्ज कराया गया। पुलिस अब ये पता लगाने में जुटी है कि मोबाइल जेल के भीतर कैसे पहुंचा और इसका इस्तेमाल कब से किया जा रहा था। फोन की कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी जानकारी भी जांच का हिस्सा हो सकती है।

बलजीत यादव बोले- FIR बेबुनियाद
मोबाइल बरामदगी के बाद दर्ज मामले को बलजीत यादव ने स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने FIR को बेबुनियाद बताते हुए इसके विरोध में जेल के अंदर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
यादव ने DGP को लिखे पत्र में अपने पक्ष को सामने रखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ मोबाइल बरामदगी के मामले में जो FIR दर्ज की गई है, वो सही नहीं है।
जेल में मोबाइल कैसे पहुंचा, पुलिस के सामने बड़ा सवाल
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाई-सिक्योरिटी जयपुर सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन पहुंचा कैसे? पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मोबाइल यादव तक किसके जरिए पहुंचा। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि फोन का इस्तेमाल जेल में रहते हुए किन लोगों से संपर्क के लिए किया गया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और फोन की तकनीकी जांच से पुलिस को इस बारे में सुराग मिलने की उम्मीद है।
ये सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि जयपुर सेंट्रल जेल में हाल के दिनों में लगातार मोबाइल फोन बरामद होने के मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक यादव के मामले से पहले भी जेल में तलाशी के दौरान कई मोबाइल बरामद किए गए थे और दूसरे बंदियों के खिलाफ भी केस दर्ज हुए हैं।
3.72 करोड़ के कथित MLA फंड घोटाले में जेल में हैं यादव
बलजीत यादव पहले से ही एक कथित MLA फंड घोटाले के मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। आरोप है कि बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से खेल सामग्री खरीदने में अनियमितताएं हुईं। उन पर करीब 3.72 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता का आरोप है। ACB ने दिसंबर 2024 में मामला दर्ज किया था। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की और 3 फरवरी 2026 को यादव को गिरफ्तार किया। 7 फरवरी को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत
मोबाइल विवाद से पहले बलजीत यादव को जमानत के मोर्चे पर भी राहत नहीं मिली थी। रिपोर्टों के मुताबिक राजस्थान हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
अब आगे क्या?
बलजीत यादव की भूख हड़ताल के बाद मामला अब जेल प्रशासन के साथ-साथ पुलिस के स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल बलजीत यादव की भूख हड़ताल ने मोबाइल बरामदगी के मामले को नया राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में DGP को भेजे गए पत्र पर क्या कार्रवाई होती है और पुलिस की जांच में क्या सामने आता है, इस पर नजर रहेगी।
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