अब हनुमान बेनीवाल पर आकर टिकी SI भर्ती 2021 के रिएग्जाम के अभ्यर्थियों की ‘आखिरी उम्मीद’!

राजस्थान की SI भर्ती...एक ऐसा मामला, जिसने पिछले कई सालों से हजारों अभ्यर्थियों को सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक संघर्ष करने को मजबूर किया है। अब एक बार फिर इस भर्ती को लेकर सवाल उठ रहे हैं और इस बार अभ्यर्थियों की नजरें हनुमान बेनीवाल पर टिक गई हैं। बीते दिन SI भर्ती रिएग्जाम के कई अभ्यर्थी हनुमान बेनीवाल से मिलने पहुंचे। अभ्यर्थियों ने अपनी पूरी समस्या उनके सामने रखी और बताया कि आखिर वे 20 सितंबर को हुई रिएग्जाम को रद्द कराने की मांग क्यों कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि परीक्षा का पेपर इतना कठिन था कि उसे देखकर उन्हें लगा कि पेपर तैयार करने वाले ने भी शायद इसे हल नहीं किया होगा. तो कुछ अभ्यर्थियों ने तो यहां तक सवाल उठाया कि क्या यह पेपर AI की मदद से तैयार किया गया था?
SI भर्ती परीक्षा 2021 के लिए बेनीवाल ने चलाया था आंदोलन
लेकिन इस पूरी कहानी में हनुमान बेनीवाल का नाम इसलिए अहम हो जाता है क्योंकि SI भर्ती 2021 की मूल परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कराने की मांग को उन्होंने भी लगातार उठाया था। उस समय किरोड़ी लाल मीणा के साथ हनुमान बेनीवाल भी इस मुद्दे को लेकर मुखर रहे थे। आखिरकार सरकार ने 2021 की SI भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला हुआ।
और अब वही भर्ती परीक्षा दोबारा होने के बाद फिर सवालों के घेरे में है। यानी अभ्यर्थियों के सामने सवाल सिर्फ एक कठिन पेपर का नहीं है। सवाल ये है कि अगर पेपर का स्तर ही ऐसा रहा कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उसे लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं, तो क्या इस परीक्षा के नतीजे के बाद पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थी चयनित हो पाएंगे?
भर्ती के बगैर खाली रह जाएंगे पद
अभ्यर्थियों के बीच ये चर्चा भी है कि अगर बड़ी संख्या में पद खाली रह जाते हैं, तो इसका असर पूरी भर्ती प्रक्रिया पर पड़ेगा। यही वजह है कि अब अभ्यर्थियों की उम्मीद एक बार फिर उस नेता पर जाकर टिक रही है, जिसने पिछली SI भर्ती के मामले में भी उनकी आवाज को सड़क से लेकर सरकार तक पहुंचाया था।
क्या ये भी परीक्षा होगी रद्द?
लेकिन इस बार चुनौती पहले से अलग है। क्योंकि 2021 की परीक्षा का मामला पेपर लीक से जुड़ा था, जबकि 20 सितंबर की रिएग्जाम को लेकर अभ्यर्थियों की मुख्य शिकायत पेपर के कठिन स्तर और परीक्षा की प्रक्रिया को लेकर है। अब देखना यही है कि हनुमान बेनीवाल इस पूरे मामले को किस तरह उठाते हैं। क्या वे अभ्यर्थियों की मांग के समर्थन में सरकार के सामने रिएग्जाम रद्द करने की मांग रखेंगे? क्या सरकार अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर कोई फैसला लेगी? या फिर 2021 की तरह इस बार भी ये मामला राजस्थान की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनेगा? फिलहाल अभ्यर्थियों की नजरें हनुमान बेनीवाल पर हैं...और सबसे बड़ा सवाल यही कि क्या 2021 की मूल परीक्षा की तरह इस बार की रिएग्जाम को भी रद्द कराने की लड़ाई बेनीवाल लड़ेंगे?
ये भी पढ़ें- विश्वेंद्र सिंह का डोटासरा पर हमला, भरतपुर-डीग निकाय हार पर फोड़ा ठीकरा, जाट सियासत में घमासान?
ये भी पढ़ें- स्कूल में बच्चों को सियासत का पाठ पढ़ा रहे मदन दिलावर? शिक्षा के मंदिर में दे रहे राजनीतिक भाषण
इस लिंक को शेयर करें

