बच्चों की सोशल मीडिया से दूरी: ऑस्ट्रेलिया के फैसले पीएम मोदी के जिक्र के बाद भारत में छिड़ी बहस

Child online Safety: आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया बच्चों और युवाओं की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, मनोरंजन, दोस्तों से बातचीत और जानकारी हासिल करने तक, लगभग हर काम के लिए बच्चे घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिता रहे हैं। हालांकि, बढ़ता स्क्रीन टाइम, साइबर बुलिंग, फेक न्यूज, ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराध जैसी समस्याओं ने बच्चों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
दरअसल बीते दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे। यहां के मार्वल स्टेडियम में मेलबर्न मीट्स मोदी कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। यहां पर पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के उस कानून की तारीफ की जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के मुद्दे को गंभीर बताते हुए ऑस्ट्रेलिया के इस कदम की सराहना की थी। इसके बाद अब भारत में भी ये बहस तेज हो गई है कि क्या बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसा कानून यहां भी बनाया जाना चाहिए।
आखिर क्या है ऑस्ट्रेलिया का नया कानून?
ऑस्ट्रेलिया ने बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए 2025 में कानून लागू किया था। इसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट नहीं बना सकेंगे। इस कानून का उद्देश्य बच्चों को साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण, डिजिटल लत और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से बचाना है। कानून का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सोशल मीडिया कंपनियों की होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा आज के समय की बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भारत में भी आयु-आधारित नियम लागू किए जाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या भारत में भी लग सकता है ऐसा प्रतिबंध?
फिलहाल भारत सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर किसी तरह का प्रतिबंध लागू नहीं किया है। हालांकि जानकारों का मानना है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सख्त नियमों की जरूरत है। उनका कहना है कि बढ़ते साइबर अपराध, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ठगी और अनुचित कंटेंट तक आसान पहुंच बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन रही है। इसका असर उनकी पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और बर्ताव पर भी पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को पूरी तरह सोशल मीडिया से दूर रखना समाधान नहीं है। इसके बजाय मजबूत Age Verification, Parental Control, सुरक्षित कंटेंट फिल्टर और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना ज्यादा प्रभावी उपाय हो सकते हैं।
कंटेंट- नेहा कुमारी
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