Task Masking: काम से ज्यादा बिजी दिखने की होड़! कॉर्पोरेट दुनिया में क्यों तेजी से बढ़ रहा है 'टास्क मास्किंग' का ट्रेंड?

Task Masking: बदलते कॉर्पोरेट कल्चर में आज एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में है, जिसे 'टास्क मास्किंग कहा जाता है। इसमें कई कर्मचारी खुद काम से ज्यादा बिजी दिखाने की कोशिश करते हैं। यानी कंपनी की प्रोडक्टिवटी से ज्यादा भाव इस बात को दिया जा रहा है कि कर्मचारी कंपनी में कितना बिजी दिखाई दे रहा है।
जानकारों का मानना है कि ये ट्रेंड खासतौर पर हाइब्रिड और वर्क फ्रॉम होम कल्चर के बाद तेजी से बढ़ा है। कई कर्मचारी ये महसूस करते हैं कि अगर वे हर समय ऑनलाइन या एक्टिव नहीं दिखेंगे, तो उनकी परफॉर्मेंस पर सवाल उठ सकते हैं।
क्या है टास्क मास्किंग?
टास्क मास्किंग का मतलब है खुद को ऐसा दिखाना कि जिससे ये लगे कि कर्मचारी लगातार काम कर रहा है, जबकि वास्तविकता में उसकी प्रोडक्टिविटी उतनी नहीं है। ये कुछ इन तरीकों से खुद को बिजी दिखाते हैं। जैसे-
-लंबे समय तक लैपटॉप के सामने बैठे रहना।
-बार-बार ईमेल चेक करना।
-बिना जरूरत लगातार मीटिंग में शामिल रहना।
-चैटिंग प्लेटफॉर्म पर हमेशा "Active" स्टेटस दिखाना।
-देर तक ऑफिस में रुकना।
-स्क्रीन पर लगातार बिजी दिखाई देना, भले कोई जरूरी काम ना हो।
आखिर क्यों बढ़ रहा है ये ट्रेंड?
जानकारों के मुताबिक कर्मचारियों को नौकरी खोने का डर होता है, कंपनी में प्रदर्शन को लेकर दबाव बना रहता है, वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड वर्क कल्चर में तो कर्मचारियों से हर वक्त उपलब्ध रहने का प्रेशर रहता है।
कई कर्मचारियों को लगता है कि अगर वो कुछ देर का ब्रेक भी लेते हैं, तो इससे उनके काम करने के तरीके पर सवाल उठ सकते हैं। यही वजह है कि वो असली काम से ज्यादा खुद को बिजी दिखाने की कोशिश करते हैं।
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वर्क कल्चर के लिए क्यों है चिंता का विषय?
टास्क मास्किंग इस बात का संकेत देता है कि कई कंपनियों पर प्रोडेक्टिविटी के बजाय बिजी दिखने को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इसका असर कर्मचारियों की मेंटल हेल्थ और प्रोडक्टिविटी दोनों पर पड़ता है। क्योंकि लगातार बिजी दिखने की कोशिश में तनाव, थकान और काम की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कर्मचारियों का प्रोडक्टिविटी उनके स्क्रीन टाइम, ऑफिस में बिताए गए घंटों या ऑनलाइन स्टेटस के आधार पर नहीं, बल्कि उनके काम की गुणवत्ता, नतीजों और कार्यकुशलता के आधार पर किया जाना चाहिए।
साथ ही कंपनियों को कर्मचारियों पर गैरजरूरी निगरानी और दबाव कम करना चाहिए। कर्मचारियों को भरोसा, स्वतंत्रता और बेहतर कार्य वातावरण देना जरूरी है ताकि वे बिना किसी दिखावे के अपनी क्षमता के मुताबिक ही काम कर सकें।
कंटेंट- नेहा कुमारी
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