Rahul Gandhi: राहुल गांधी का पुष्कर दौरे से क्या राजस्थान में कुछ बदलने वाला है?

Rajasthan Congress: "अभी मेरे साथ काम करो, समय आने पर राजस्थान भी तुम्हें सौंपेंगे!" याद है ना आपको राहुल गांधी का ये वो ऐतिहासिक वादा, जो उन्होंने तब किया था जब सचिन पायलट को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था?लगता है कि राहुल गांधी अब अपना वो पुराना वादा निभाने की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। क्योंकि इस वक्त राजस्थान कांग्रेस के गलियारों से जो खबरें छनकर आ रही हैं, वो ये बताने के लिए काफी हैं कि मरुधरा की राजनीति में बहुत बड़ा 'तख्तापलट' होने वाला है।
पायलट या डोटासरा किसे मिलेगी जिम्मेदारी
चर्चाएं तेज हैं, अटकलों का बाजार गर्म है और सियासी पंडित भी हैरान हैं। सुगबुगाहट है कि राजस्थान में सचिन पायलट को 'फ्री हैंड' मिलने जा रहा है, यानी साल 2028 के विधानसभा चुनावों का 'कैप्टन' पायलट को बनाया जा सकता है। याद कीजिए साल 2014, जब सिर्फ 21 विधायकों पर सिमटी कांग्रेस को अपने खून-पसीने से सींचकर 2018 में सत्ता की दहलीज तक पहुंचाने वाले चेहरा सचिन पायलट ही थे और अब, इसी 'सब्र के मीठे फल' को पूरी तरह चखने का वक्त आ गया है।
लेकिन ट्विस्ट सिर्फ इतना नहीं है। चर्चा ये भी है कि प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को दिल्ली बुलाकर आलाकमान कोई बहुत बड़ी और राष्ट्रीय जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी में है।
कांग्रेस में संयुक्त प्रशिक्षण शिविर का आज आखिरी दिन
दरअसल ब्रह्मा जी की पवित्र नगरी पुष्कर के तिलोरा इन दिनों राजस्थान कांग्रेस की नई सियासत का 'पावर सेंटर' बना हुआ है। पिछले 10 दिनों से यहां एक बेहद खास और कड़ा चिंतन-प्रशिक्षण शिविर चल रहा है। इस शिविर का नियम कायदे सुनेंगे तो आप भी चौंक जाएंगे। राजस्थान के 50 और दिल्ली के 15 जिला अध्यक्ष इस शिविर में हिस्सा ले रहे हैं। सुबह उठकर खुद झाड़ू लगाने से लेकर, अपने खाने के बर्तन खुद धोने तक का कड़ा अनुशासन यहां सिखाया जा रहा है। कांग्रेस इसे 'संगठन सृजन अभियान' कह रही है।
राहुल गांधी अब पुष्कर में हैं। शिविर के समापन सत्र में हिस्सा ले रहे हैं। उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और खुद सचिन पायलट समेत दिग्गजों का पूरा मेला यहां जुटा हुआ है।
साफ है कि राहुल गांधी का यह पुष्कर दौरा सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं है। ये राजस्थान कांग्रेस को 'पुराने ढर्रे' से निकालकर 'नई सोच और युवा लीडरशिप' के सांचे में ढालने की बड़ी कवायद है। इस मंच से राहुल गांधी जो संदेश देंगे, उससे साफ हो जाएगा कि राजस्थान में आगामी राज्यसभा चुनाव और भविष्य की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठने वाला है।
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