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RAS पंकज ओझा पर ACB का शिकंजा! 17A मंजूरी मांगी, कथित ऑडियो केस में FIR की तैयारी

RAS पंकज ओझा पर ACB का शिकंजा! 17A मंजूरी मांगी, कथित ऑडियो केस में FIR की तैयारी
राजस्थान
12 Sept 2026, 01:38 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

राजस्थान में खाद्य सुरक्षा विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक और RAS अधिकारी पंकज ओझा से जुड़े कथित वायरल ऑडियो मामले में अब एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB ने जांच को अगले चरण में पहुंचा दिया है। ACB ने कार्मिक विभाग से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत मंजूरी मांगी है। बताया जा रहा है कि परिवाद पर प्राथमिक स्तर की जांच के बाद ACB ने पंकज ओझा के खिलाफ अभियोजन कार्रवाई की परमिशन मांगी है।

अब पूरे मामले में कार्मिक विभाग के फैसले पर नजर है। अगर 17A की मंजूरी मिलती है तो ACB की तरफ से पंकज ओझा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

क्या है पूरा मामला?

मामला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग में पंकज ओझा की तैनाती के दौरान सामने आए एक कथित ऑडियो से जुड़ा है। सोशल मीडिया और कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वायरल ऑडियो में पंकज ओझा और मिलावटी घी-तेल के कारोबार से जुड़े कथित कारोबारियों और माफिया के बीच बातचीत है।

ऑडियो में कथित तौर पर खाद्य विभाग की कार्रवाई, छापेमारी और कारोबारियों को कार्रवाई से बचाने से जुड़ी बातचीत होने का दावा किया गया था। हालांकि, इस ऑडियो की फॉरेंसिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

इसी कथित ऑडियो और पंकज ओझा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर ACB में परिवाद पहुंचा था। अब इसी परिवाद की जांच के बाद ACB ने आगे की कार्रवाई के लिए 17A की अनुमति मांगी है।

पहले भी उठ चुके हैं पंकज ओझा की भूमिका पर सवाल

ये पहली बार नहीं है जब पंकज ओझा का नाम कथित भ्रष्टाचार और मिलावटखोरी के मामलों में सामने आया हो। अप्रैल 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वायरल ऑडियो को लेकर पंकज ओझा पर मिलावटखोरों को संरक्षण देने और खाद्य विभाग की कार्रवाई से जुड़ी कथित सेटिंग के आरोप लगाए गए थे। उस रिपोर्ट में ये भी बताया गया था कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर को मामले की शिकायत मिली थी और शिकायत को ACB तक भेजे जाने की बात सामने आई थी।

इसके अलावा, सितंबर 2025 में IPS पंकज चौधरी की शिकायत के बाद तत्कालीन मुख्य सचिव सुधांश पंत की तरफ से मामले का संज्ञान लिए जाने और स्वास्थ्य विभाग से रिकॉर्ड तलब किए जाने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट में पंकज ओझा पर मिलावट माफिया से कथित मिलीभगत के आरोपों का जिक्र किया गया था।

मई 2024 में जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (VKI Area) में खाद्य विभाग ने एक गोदाम पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में घटिया घी जब्त किया था। कार्रवाई पंकज ओझा के नेतृत्व में होने की रिपोर्ट सामने आई थी। जांच में कथित तौर पर 'श्री सरस' नाम से सरकारी ब्रांड 'सरस' से मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल कर घी बेचने की बात सामने आई थी।

क्या है धारा 17A?

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में धारा 17A सरकारी अधिकारियों को उनके आधिकारिक फैसलों या सिफारिशों से जुड़े मामलों में सीधे जांच शुरू होने से पहले एक कानूनी सुरक्षा देती है।

कानून के मुताबिक, अगर किसी लोक सेवक के खिलाफ कथित अपराध उसके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में लिए गए किसी निर्णय या सिफारिश से संबंधित है, तो पुलिस अधिकारी को जांच या पूछताछ शुरू करने से पहले संबंधित सरकार या सक्षम प्राधिकारी की पहले परमिशन लेनी होती है। संबंधित प्राधिकारी को आमतौर पर 3 महीने में फैसला देना होता है, जिसे लिखित कारणों के साथ एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है।

लेकिन इसका एक अहम पहलू भी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2026 में साफ किया है कि रिश्वत की मांग जैसे कांड को केवल इसलिए आधिकारिक कर्तव्य नहीं माना जा सकता कि वह किसी सरकारी अधिकारी से जुड़ा है, ऐसे मामलों में धारा 17A की सुरक्षा लागू नहीं हो सकती।

अगर मंजूरी मिली तो आगे क्या होगा?

अगर कार्मिक विभाग ACB को 17A के तहत अनुमति देता है, तो एजेंसी आगे आपराधिक मामला दर्ज करने की दिशा में बढ़ सकती है। इसके बाद इस कथित ऑडियो की जांच की जाएगी।

पंकज ओझा का नाम इससे पहले भी ACB से जुड़े एक पुराने मामले में सामने आ चुका है। 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, कोटा में राजस्व अपील अधिकारी रहते हुए उनके नाम से कथित रिश्वत मांगने के मामले में दो लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी और पंकज ओझा की भूमिका को संदिग्ध मानकर जांच की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार मामला भूमि विवाद से जुड़ा था और 15 लाख रुपये की कथित मांग का आरोप लगाया गया था।

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