होम/politics/bharatpur-mayor-election-vichitra-singh-jawahar-bedham-ashok-gehlot

भरतपुर में मेयर चुनाव से पहले बड़ा खेल! मंत्री बेढम की मौजूदगी में निर्दलीय प्रत्याशी ने वापस लिया नामांकन, गहलोत ने लगाया दबाव का आरोप

भरतपुर में मेयर चुनाव से पहले बड़ा खेल! मंत्री बेढम की मौजूदगी में निर्दलीय प्रत्याशी ने वापस लिया नामांकन, गहलोत ने लगाया दबाव का आरोप
राजनीति
18 Sept 2026, 01:27 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

भरतपुर: राजस्थान के भरतपुर नगर निगम में मेयर की कुर्सी को लेकर चल रही सियासी खींचतान अब एक नए विवाद में बदल गई है। निर्दलीय मेयर प्रत्याशी विचित्रा सिंह के नामांकन वापस लेने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि नामांकन वापसी से एक दिन पहले उनके प्रतिष्ठानों पर प्रशासन ने दबाव बनाया और धमकाया। इसके बाद शुक्रवार को गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म के पहुंचने के बाद विचित्रा सिंह ने अपना नामांकन वापस ले लिया।

हालांकि, प्रशासन या गृह राज्य मंत्री की तरफ से इन आरोपों की पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए नामांकन वापसी को लेकर सामने आए आरोपों पर कुछ पुख्ता नहीं कहा जा सकता।

कल तक भाजपा के सामने खड़ी थीं विचित्रा सिंह

भरतपुर नगर निगम में मेयर पद के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया था। वार्ड नंबर 17 से निर्दलीय पार्षद चुनी गईं विचित्रा सिंह ने 16 सितंबर को मेयर पद के लिए दो निर्दलीय नामांकन दाखिल किए थे। उनके साथ उनके पति और पूर्व मेयर शिव सिंह भोंट भी मौजूद थे।

दूसरी तरफ भाजपा ने वार्ड नंबर 61 से पार्षद अनुराधा सिंह को मैदान में उतारा था। 17 सितंबर को हुई नामांकन पत्रों की जांच में विचित्रा सिंह और अनुराधा सिंह के नामांकन वैध पाए गए थे। यानी गुरुवार तक भरतपुर में मेयर पद के लिए सीधा राजनीतिक मुकाबला दिखाई दे रहा था।

भरतपुर में निर्दलीयों का पलड़ा भारी

भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में भाजपा को 20, कांग्रेस को 7, बसपा को 1 और RLP को 1 सीट मिली है, जबकि 36 निर्दलीय पार्षद चुनाव जीते हैं।

यही वजह है कि मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई थी। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद 21 के बहुमत के आंकड़े से एक सीट पीछे थी, जबकि निर्दलीयों की संख्या 36 है।

वहीं विचित्रा सिंह को कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर समर्थन मिलने की चर्चा थी। उनके पति शिव सिंह भोंट ने अलग-अलग दलों के पार्षदों के समर्थन का दावा भी किया था।

नामांकन वापसी ने बढ़ाए सवाल

अब नामांकन वापस लिए जाने के घटनाक्रम ने भरतपुर की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप है कि नामांकन वापसी से पहले विचित्रा सिंह के प्रतिष्ठानों पर प्रशासनिक दबाव बनाया गया। इसके बाद शुक्रवार को गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म के उनके पास पहुंचने और उनके नामांकन वापस लेने की बात सामने आई है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन की तरफ से किसी दबाव या धमकी की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

भाजपा के लिए आसान हुआ मेयर का रास्ता?

विचित्रा सिंह के नामांकन वापस लेने से मेयर पद की चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। इससे भाजपा प्रत्याशी अनुराधा सिंह के सामने मुकाबला पहले की तुलना में अलग हो गया है।

ये इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भरतपुर में भाजपा के पास 20 पार्षद हैं, जबकि निर्दलीय 36 हैं। मेयर चुनाव में पार्षदों के वोट से तस्वीर बननी है। ऐसे में विचित्रा सिंह की मौजूदगी भाजपा के सामने एक संभावित चुनौती खड़ी कर रही थी। अब उनके नामांकन वापस लेने के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं।

सोशल मीडिया से लेकर जमीन पर उठ रहे ये बड़े सवाल?

1-क्या विचित्रा सिंह ने अपनी इच्छा से नामांकन वापस लिया या उन पर दबाव था?

2- उनके प्रतिष्ठानों पर प्रशासनिक कार्रवाई क्यों की गई?

3- नामांकन वापसी के समय गृह राज्य मंत्री की मौजूदगी की क्या भूमिका रही, क्या ये आरोप सच है कि मुख्यमंत्री और मंत्री भरतपुर में मेयर चुनाव में दबाव बना रहे हैं?

4- क्या निर्दलीय पार्षदों के बीच बन रहे समीकरण को तोड़ने की कोशिश हुई?

5- क्या विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग या प्रशासन के सामने शिकायत करेगा?

पूर्व CM गहलोत ने लगाया सीधा आरोप

इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कल भरतपुर में कल भरतपुर में निर्दलीय मेयर प्रत्याशी के प्रतिष्ठानों पर प्रशासन ने धमकाया और आज खुद गृहराज्य मंत्री ने पहुंचकर प्रत्याशी का नामांकन वापस करवा दिया।

गहलोत ने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री के गृह जिले में सरकार के मंत्री जाकर लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं। भरतपुर की जनता ने भाजपा को नकार दिया था। वहां 65 में से 20 ही पार्षद जीत पाए थे। इसके बावजूद सरकार और पूरा प्रशासन मिलकर अलोकतांत्रिक तरीके से भाजपा का मेयर बना रहे हैं।

ये भी पढ़ें- राजस्थान में क्यों फेल हुआ BJP का मुस्लिम दांव? क्या ओवैसी-बेनीवाल फैक्टर बना चुनौती


इस लिंक को शेयर करें

ads

लेटेस्ट खबरें

ads
© 2026 Bharat Raftar. All rights reserved. Powered By Zentek.