जयपुर नगर निगम चुनाव: कांग्रेस ने टिकट को लेकर खींची लकीर, वार्ड बदला तो नहीं मिलेगा टिकट

जयपुर: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद कांग्रेस ने जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन का फॉर्मूला लगभग साफ कर दिया है। पार्टी ने तय किया है कि टिकट के दावेदार वार्ड बदलकर चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। जिस वार्ड में कार्यकर्ता का निवास है, सामान्य तौर पर उसी वार्ड से उसकी दावेदारी स्वीकार की जाएगी। इसके साथ ही पार्टी ने पिछले चुनावों में बगावत या ‘गद्दारी’ करने वाले नेताओं-कार्यकर्ताओं को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है।
कांग्रेस का ये फैसला ऐसे समय आया है जब वार्डों के आरक्षण और परिसीमन के बाद कई मौजूदा पार्षदों और दावेदारों के चुनावी समीकरण बदल गए हैं। आरक्षण बदलने के कारण कुछ नेता दूसरे वार्डों से टिकट की कोशिश कर रहे थे। पार्टी की नई गाइडलाइन से ऐसे दावेदारों की राह मुश्किल हो गई है।
वार्ड बदला तो टिकट की दावेदारी नहीं
कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने साफ किया है कि जिस वार्ड में कार्यकर्ता का घर है, टिकट के लिए उसकी दावेदारी भी उसी वार्ड से होनी चाहिए। यदि किसी मौजूदा पार्षद का वार्ड आरक्षण के कारण उसके अनुकूल नहीं रहा है और वह दूसरे वार्ड से टिकट मांगता है, तो पार्टी इसे सामान्य तौर पर स्वीकार नहीं करेगी।
दरअसल, नए आरक्षण के बाद कई सामान्य वर्ग के दावेदारों के वार्ड महिला, ओबीसी, एससी या एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हो गए हैं। ऐसे में कुछ दावेदार दूसरे वार्डों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। कांग्रेस के फैसले का सीधा असर इन्हीं नेताओं की टिकट दावेदारी पर पड़ सकता है।
कांग्रेस का तर्क: स्थानीय कार्यकर्ता को प्राथमिकता
पार्टी का मानना है कि पार्षद का चुनाव स्थानीय स्तर पर संगठन और व्यक्तिगत जनसंपर्क पर निर्भर करता है। ऐसे में दूसरे वार्ड से उम्मीदवार उतारने के बजाय उसी वार्ड में लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ता को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई गई है।
जयपुर शहर कांग्रेस के सामने फिलहाल टिकट के लिए बड़ी संख्या में दावेदार हैं। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी को 150 वार्डों के लिए 1350 से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं। प्रत्याशियों के चयन में संगठनात्मक फीडबैक के साथ प्रोफेशनल कंपनी के सर्वे को भी शामिल किया जा रहा है।
‘गद्दारों’ पर भी कांग्रेस की नजर, बगावत करने वालों को टिकट नहीं
कांग्रेस ने केवल वार्ड बदलने वाले दावेदारों पर ही शिकंजा नहीं कसा है। पार्टी उन नेताओं और कार्यकर्ताओं का रिकॉर्ड भी देख रही है जिन्होंने पिछले चुनावों में पार्टी के खिलाफ काम किया था।
जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा ने कहा है कि पिछले बोर्ड के दौरान पार्टी से दगा करने वालों को अगले पांच साल तक टिकट नहीं दिया जाएगा। हालांकि, जिन निर्दलीय पार्षदों ने कांग्रेस का बोर्ड बनाने में मदद की थी, उनके मामलों पर अलग से विचार किया जा सकता है।
प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी के साथ बगावत करने वालों को लेकर सख्त संदेश दिया है। उनका कहना है कि पहले पार्टी के लिए काम करना होगा, उसके बाद ही टिकट की उम्मीद की जा सकती है। यानी कांग्रेस इस बार केवल जीतने की क्षमता नहीं, बल्कि पार्टी के प्रति वफादारी को भी टिकट चयन का महत्वपूर्ण आधार बनाने जा रही है।
टिकट के लिए सर्वे और संगठनात्मक फीडबैक होगा अहम
कांग्रेस ने टिकट वितरण को किसी एक नेता के फैसले तक सीमित रखने के बजाय कई स्तरों पर राय लेने की व्यवस्था बनाई है। दावेदारों के आवेदन जिला कांग्रेस कमेटियों तक भेजे जा रहे हैं और वहां राजनीतिक मामलों की समितियां उनकी समीक्षा करेंगी। इसके अलावा सर्वे और स्थानीय संगठन से मिले फीडबैक को भी टिकट चयन में शामिल किया जाएगा।
पार्टी ने जयपुर में चुनाव संचालन के लिए अलग-अलग समितियां भी बनाई हैं। शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा को कैंपेन कमेटी की जिम्मेदारी, प्रताप सिंह खाचरियावास को स्टीयरिंग कमेटी, विधायक रफीक खान को पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी और विधायक अमीन कागजी को अनुशासन समिति की जिम्मेदारी दी गई है।
कांग्रेस का ‘मिशन-100’, 150 में से 100 वार्ड जीतने का दावा
जयपुर नगर निगम में कुल 150 वार्ड हैं और कांग्रेस ने इस बार ‘मिशन-100’ का लक्ष्य रखा है। पार्टी का दावा है कि वो 100 वार्डों में जीत हासिल कर नगर निगम में अपना बोर्ड बनाएगी। इसके लिए कांग्रेस ने हर वार्ड के लिए अलग घोषणा पत्र तैयार करने की योजना बनाई है।
पार्टी के एजेंडे में स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। वार्ड स्तर पर सड़क, सफाई, पेयजल, कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों को घोषणा पत्र में शामिल करने की तैयारी है। इसके साथ जयपुर के लिए एक व्यापक विजन प्लान तैयार करने की भी बात सामने आई है।
युवाओं, महिलाओं और ओबीसी को भी टिकट में हिस्सेदारी
कांग्रेस पहले ही संकेत दे चुकी है कि निकाय और पंचायत चुनावों में युवाओं को बड़ी संख्या में मौका दिया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 50 साल से कम उम्र के उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत टिकट देने का ऐलान किया था।
जयपुर में भी पार्टी युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा है कि टिकट वितरण में Gen-Z, महिलाओं और ओबीसी वर्ग को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
चुनाव की तारीखें भी हो चुकी हैं तय
राजस्थान में इस बार 309 नगरीय निकायों के चुनाव होने हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार कुल 1,44,03,853 मतदाता इन चुनावों में मतदान करेंगे। जयपुर नगर निगम में सबसे ज्यादा 24,20,839 मतदाता हैं। राज्य में वार्डों का भी पुनर्गठन और परिसीमन किया गया है।
चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक मतदान दो चरणों में होगा। 9 और 11 सितंबर 2026 को मतदान कराया जाएगा, जबकि जयपुर में मतदान 11 सितंबर को होने की जानकारी सामने आई है। चुनाव की अधिसूचना 27 अगस्त को जारी होनी है।
अब असली चुनौती टिकट के बाद शुरू होगी
कांग्रेस ने वार्ड बदलकर टिकट मांगने वालों और पुराने बागियों को लेकर भले ही अपना रुख स्पष्ट कर दिया हो, लेकिन असली परीक्षा टिकट वितरण के बाद होगी। 150 वार्डों के लिए 1350 से ज्यादा आवेदन आने का मतलब है कि औसतन हर वार्ड में कई दावेदार टिकट की दौड़ में हैं।
ऐसे में टिकट से वंचित दावेदारों को साधना कांग्रेस के लिए उतना ही महत्वपूर्ण होगा, जितना सही प्रत्याशी चुनना। पार्टी अगर ‘मिशन-100’ हासिल करना चाहती है तो उसे टिकट के बाद होने वाली संभावित बगावत को रोकना होगा। यही वजह है कि इस बार कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन के साथ-साथ अनुशासन और संगठनात्मक एकजुटता को भी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है।
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