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राजस्थान BJP का अगला प्रदेश प्रभारी कौन? सतीश पूनिया समेत इन बड़े नामों की दौड़

राजस्थान BJP का अगला प्रदेश प्रभारी कौन? सतीश पूनिया समेत इन बड़े नामों की दौड़
राजनीति
25 Aug 2026, 01:41 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

जयपुर। राजस्थान बीजेपी में प्रदेश प्रभारी को लेकर सियासी हलचल तेज है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी जल्द ही राजस्थान के लिए नए प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति कर सकती है। बीजेपी की परंपरा रही है कि बड़े राज्यों में राष्ट्रीय महासचिव स्तर के नेताओं को प्रभारी की जिम्मेदारी दी जाती है, जबकि राष्ट्रीय सचिवों को आमतौर पर सह प्रभारी बनाया जाता है। राजस्थान के लिए संभावित नामों में सतीश पूनियां, सुनील बंसल, विनोद तावड़े, तरुण चुघ, बिप्लब देब, हरीश द्विवेदी और स्मृति ईरानी समेत कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं।

सतीश पूनिया से लेकर सुनील बंसल तक नाम चर्चा में

बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में फिलहाल आठ राष्ट्रीय महासचिव हैं। इनमें राजस्थान से आने वाले सतीश पूनिया और लंबे समय तक राजस्थान बीजेपी संगठन में काम कर चुके सुनील बंसल भी शामिल हैं।

सतीश पूनिया वर्तमान में पंजाब के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वहीं सुनील बंसल को राजस्थान संगठन की गहरी समझ रखने वाला नेता माना जाता है। ऐसे में दोनों के नाम राजस्थान प्रभारी की संभावित दौड़ में अहम माने जा रहे हैं।

इसके अलावा विनोद तावड़े उत्तर प्रदेश के प्रभारी हैं, जबकि राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी तरुण चुघ को गुजरात की जिम्मेदारी दी गई है। बिप्लब कुमार देब, हरीश द्विवेदी और स्मृति ईरानी के नामों पर भी पार्टी के भीतर चर्चा होने की बात सामने आ रही है।

राजस्थान के लिए राज्यसभा सांसद को प्रभारी बनाने की परंपरा

राजस्थान में बीजेपी के पिछले संगठनात्मक समीकरणों को देखें तो राज्यसभा सांसदों को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी मिलती रही है। ऐसे में इस बार भी राज्यसभा सांसद को प्रभारी बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। इसी कड़ी में संजय भाटिया का नाम भी चर्चा में है। वह राज्यसभा सांसद हैं और फिलहाल उन्हें किसी राज्य का प्रभारी बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

बड़े राज्य में महासचिव, छोटे राज्य में सचिव

बीजेपी की संगठनात्मक रणनीति में राज्य के आकार और राजनीतिक महत्व के हिसाब से प्रभारी तय किए जाते हैं। बड़े और चुनावी लिहाज से महत्वपूर्ण राज्यों में राष्ट्रीय महासचिव को प्रभारी बनाना सामान्य रणनीति रही है। वहीं छोटे राज्यों में राष्ट्रीय सचिव को भी प्रभारी बनाया जा सकता है। कई मामलों में राष्ट्रीय सचिवों को बड़े राज्यों में सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी जाती है।

राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी के लिए प्रदेश प्रभारी की भूमिका अहम होगी। प्रभारी को संगठन, सरकार और चुनावी रणनीति के बीच समन्वय के साथ-साथ टिकट वितरण, बूथ स्तर की तैयारी और पार्टी के भीतर संभावित असंतोष को संभालने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी होगी।

फिलहाल अंतिम फैसला बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को करना है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजस्थान जैसे महत्वपूर्ण चुनावी राज्य की कमान सतीश पूनिया, सुनील बंसल या किसी नए चेहरे को मिलती है।

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