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राजस्थान के 472 सरकारी स्कूलों के लिए 401 करोड़ रुपए की मंजूरी या मजबूरी, सवाल- बजट में घोषित 2,000 करोड़ का कितना हुआ इस्तेमाल?

राजस्थान के 472 सरकारी स्कूलों के लिए 401 करोड़ रुपए की मंजूरी या मजबूरी, सवाल- बजट में घोषित 2,000 करोड़ का कितना हुआ इस्तेमाल?
राजनीति
20 Sept 2026, 06:07 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

जयपुर: राजस्थान में पंचायती राज चुनाव से ठीक पहले भजनलाल सरकार ने सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए 401 करोड़ 3 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की है। इस राशि से प्रदेश के 472 सरकारी स्कूलों में नए भवन, पुनर्निर्माण, मरम्मत, स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगशालाएं, फर्नीचर, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं पर काम किया जाएगा। ये स्वीकृति नाबार्ड की RIDF योजना के तहत दी गई है।

सरकार के इस फैसले को पंचायती राज चुनाव से पहले ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को लेकर बड़ा कदम माना जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है—फरवरी 2026 के बजट में जर्जर सरकारी स्कूलों के लिए घोषित 2,000 करोड़ के School Infrastructure Fund में अब तक कितना पैसा वास्तव में खर्च हुआ और उससे कितने स्कूलों की हालत सुधरी?

472 स्कूलों के लिए 401 करोड़ रुपए की मंजूरी

सरकार की ताजा स्वीकृति के तहत 472 सरकारी स्कूलों में अलग-अलग स्तर पर निर्माण और सुधार कार्य होंगे। इस योजना में केवल मरम्मत ही नहीं बल्कि नए भवन, स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगशाला, फर्नीचर, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। सरकार ने 41 जिलों में सरकारी स्कूलों के भवनों का तकनीकी सर्वे कराया था और उसी के आधार पर तीन साल की कार्ययोजना तैयार की गई है।

सरकार के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक करीब 12,500 करोड़ खर्च कर सरकारी स्कूलों को सुरक्षित, आधुनिक और डिजिटल बनाने की योजना है।

किस जिले में कितने स्कूल?

ताजा 401.03 करोड़ की स्वीकृति में सबसे ज्यादा स्कूल उदयपुर और झालावाड़ के शामिल हैं।

उदयपुर में 113 स्कूल, 71.92 करोड़

झालावाड़ में 84 स्कूल, 55.86 करोड़

सवाई माधोपुर में 39 स्कूल, 23.13 करोड़

बांसवाड़ा में 33 स्कूल, 14.01 करोड़

बारां में 27 स्कूल, 26.25 करोड़

दौसा में 12 स्कूल, 20.79 करोड़

अलवर में 11 स्कूल, 20.38 करोड़

डीडवाना-कुचामन में 8 स्कूल, 18.43 करोड़

झुंझुनूं में 9 स्कूल, 15.06 करोड़

खैरथल-तिजारा में 9 स्कूल, 12.45 करोड़

सीकर में 6 स्कूल, 12.70 करोड़

बीकानेर में 6 स्कूल, 10.98 करोड़

डूंगरपुर में 6 स्कूल,9.09 करोड़

बूंदी में 12 स्कूल, 8.73 करोड़

जयपुर में 10 स्कूल, 7.67 करोड़

धौलपुर में 8 स्कूल, 6.37 करोड़

हनुमानगढ़ में 5 स्कूल, 6.31 करोड़

श्रीगंगानगर में 8 स्कूल, 5.89 करोड़

सिरोही में 12 स्कूल, 5.64 करोड़

लेकिन 2,000 करोड़ के बजट का क्या हुआ?

अब आते हैं उस सवाल पर, जिस पर सरकार से जवाब मांगा जाना चाहिए। राजस्थान के 2026-27 बजट में जर्जर सरकारी स्कूल भवनों की मरम्मत, पुनर्निर्माण और मजबूती के लिए 2,000 करोड़ का School Infrastructure Fund बनाने की घोषणा की गई थी। सरकार ने इसके अलावा 1,500 से ज्यादा क्लासरूम्स, लैब और कंप्यूटर लैब के निर्माण के लिए करीब 200 करोड़ खर्च करने की बात भी कही थी। लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों में अभी तक ये साफ नहीं है कि 2,000 करोड़ में से कितनी राशि जारी हुई, कितनी खर्च हुई है,

राजस्थान में स्कूलों की हालत पर पहले भी उठे थे गंभीर सवाल

सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों का मामला नया नहीं है। राजस्थान हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य में 3,768 सरकारी स्कूल भवनों को पूरी तरह जर्जर, करीब 85 हजार कक्षाओं को अनुपयोगी और करीब 2.19 लाख कमरों को मरम्मत की जरूरत होने की जानकारी सामने आई थी। सरकार ने उस समय स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए करीब 21,000 करोड़ की जरूरत का अनुमान बताया था।

'कॉकरोच जनता पार्टी' के स्कूल ठीक करो अभियान के बाद फैसला?

सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर हाल के महीनों में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी 'स्कूल ठीक करो' अभियान चलाया। अभियान के दौरान राजस्थान के आदिवासी इलाकों के स्कूलों का दौरा कर जर्जर भवन, पेयजल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया।

अगस्त में CJP के अभियान और राजस्थान के स्कूलों की स्थिति पर राष्ट्रीय स्तर पर खबरें आने के बाद स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सरकार के इस आदेश चर्चा भी तेज हुई है।

पंचायत चुनाव से पहले स्कूलों पर बड़ा दांव

सरकार की तरफ से 401 करोड़ की स्वीकृति ऐसे समय हुई है, जब राजस्थान में पंचायती राज चुनाव का माहौल है। जिन 472 स्कूलों को योजना में शामिल किया गया है, उनमें बड़ी संख्या ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की है। सरकार के सामने अब सिर्फ राशि मंजूर करने की चुनौती नहीं है, बल्कि ये दिखाने की भी चुनौती है कि मंजूर पैसा जमीन पर कितना पहुंचा और उससे वास्तव में कितने स्कूलों की तस्वीर बदली।

क्योंकि सवाल सिर्फ ये नहीं है कि 401 करोड़ मंजूर हुए या 2,000 करोड़ का फंड बनाया गया। असली सवाल यह है कि जर्जर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को इसका फायदा कब और कितना मिला?

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