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राजस्थान नगर निकाय चुनाव नतीजे 2026: साफ हुई 10 निगमों की तस्वीर, 5 में बीजेपी 3 में कांग्रेस का दबदबा, 2 में निर्दलियों का बोर्ड!

राजस्थान नगर निकाय चुनाव नतीजे 2026: साफ हुई 10 निगमों की तस्वीर, 5 में बीजेपी 3 में कांग्रेस का दबदबा, 2 में निर्दलियों का बोर्ड!
राजनीति
14 Sept 2026, 04:38 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

राजस्थान नगर निकाय चुनाव के तहत 10 नगर निगमों के नतीजे अब सामने आ चुके हैं। लगभग फाइनल होते नतीजों में बीजेपी 5 नगर निगमों में सबसे आगे है, जबकि कांग्रेस 3 निगमों में बढ़त बनाए हुए है। वहीं जोधपुर में बीजेपी और कांग्रेस बराबरी पर हैं, जबकि भरतपुर में निर्दलीय और अन्य प्रत्याशियों ने दोनों प्रमुख दलों को पीछे छोड़ दिया है। इन नतीजों ने प्रदेश के बड़े शहरों में बीजेपी और कांग्रेस के प्रदर्शन की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है।

-जयपुर नगर निगम में 150 में से कुल 130 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं। यहां बीजेपी ने 68 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस के खाते में 48 सीटें गई हैं। 14 सीटों पर अन्य प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। इस तरह राजधानी जयपुर में बीजेपी ने कांग्रेस पर 20 सीटों की बढ़त बनाई है।

-जोधपुर नगर निगम का मुकाबला बेहद रोचक रहा। यहां कुल 99 सीटों में से बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने 44-44 सीटें जीती हैं। वहीं 11 सीटें अन्य प्रत्याशियों के खाते में गई हैं। दोनों प्रमुख दलों के बराबर रहने के चलते जोधपुर में अन्य पार्षदों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। दोनों ही पार्टियों इन जीते हुए प्रत्याशियों को अपने खेमे में करने के लिए दमखम लगाएंगी।

-कोटा नगर निगम में बीजेपी ने मजबूत प्रदर्शन किया है। कुल 78 घोषित सीटों में बीजेपी ने 47 सीटें अपने नाम की हैं, जबकि कांग्रेस को 29 सीटें मिली हैं। अन्य प्रत्याशियों के खाते में 2 सीटें गई हैं। इस तरह कोटा में बीजेपी ने कांग्रेस से 18 सीटों की बढ़त बनाई है।

-बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने बीजेपी को पीछे छोड़ दिया है। यहां सभी 80 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं। कांग्रेस ने 42 सीटें जीती हैं, जबकि बीजेपी को 27 सीटों पर जीत मिली है। वहीं अन्य प्रत्याशियों ने 11 सीटों पर कब्जा जमाया है। बीकानेर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

-अजमेर नगर निगम में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बीजेपी से बेहतर रहा। सभी 80 सीटों के परिणामों में कांग्रेस को 37 सीटें, बीजेपी को 32 और अन्य प्रत्याशियों को 11 सीटें मिली हैं। यानी अजमेर में कांग्रेस ने बीजेपी पर 5 सीटों की बढ़त बनाई है।

-उदयपुर नगर निगम में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है। सभी 80 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं और बीजेपी ने 53 सीटों पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस को महज 23 सीटें मिली हैं, जबकि अन्य प्रत्याशियों के खाते में 4 सीटें गई हैं। उदयपुर में बीजेपी ने कांग्रेस से 30 सीट ज्यादा जीती हैं।

-भीलवाड़ा नगर निगम में भी बीजेपी का दबदबा देखने को मिला है। सभी 70 सीटों के परिणाम सामने आ चुके हैं। बीजेपी ने 45 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस सिर्फ 10 सीटों पर सिमट गई। अन्य प्रत्याशियों ने 15 सीटें जीती हैं। यहां बीजेपी ने कांग्रेस से 35 सीटों की बड़ी बढ़त बनाई है।

-अलवर नगर निगम में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला करीबी रहा। सभी 65 सीटों में बीजेपी ने 28 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में 23 सीटें गई हैं। अन्य प्रत्याशियों ने 14 सीटों पर जीत हासिल की है। बीजेपी यहां कांग्रेस से 5 सीट आगे है।

-भरतपुर नगर निगम का परिणाम सबसे अलग रहा है। सभी 65 सीटों के नतीजों में बीजेपी को 20 और कांग्रेस को महज 7 सीटें मिली हैं, जबकि अन्य प्रत्याशियों ने 38 सीटों पर जीत दर्ज की है। यानी भरतपुर में अन्य उम्मीदवारों ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को पीछे छोड़ दिया है। ऐसे में यहां बोर्ड गठन में अन्य पार्षद निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

-पाली नगर निगम में कांग्रेस ने बढ़त बनाई है। सभी 65 सीटों के परिणामों में कांग्रेस ने 29 सीटें जीती हैं, जबकि बीजेपी के खाते में 21 सीटें गई हैं। अन्य प्रत्याशियों ने 15 सीटों पर जीत हासिल की है। इस तरह पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है।

10 नगर निगमों के नतीजों का कुल हिसाब

इन 10 नगर निगमों में आपके दिए आंकड़ों के मुताबिक कुल 812 सीटों के नतीजे घोषित हुए हैं। इनमें बीजेपी ने 385 सीटें, कांग्रेस ने 292 सीटें और अन्य प्रत्याशियों ने 135 सीटें जीती हैं। यानी कुल घोषित सीटों के लिहाज से बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है।

नतीजों का बड़ा संदेश ये है कि जयपुर, कोटा, उदयपुर, भीलवाड़ा और अलवर में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। वहीं बीकानेर, अजमेर और पाली में कांग्रेस ने बढ़त बनाई है। जोधपुर में दोनों दल बराबरी पर हैं, जबकि भरतपुर में अन्य प्रत्याशियों ने चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है।

खास बात ये है कि सिर्फ सीटों की संख्या ही नहीं, बल्कि बोर्ड गठन के लिए बहुमत का गणित भी अहम होगा। जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीय और अन्य पार्षदों की भूमिका सत्ता के समीकरण तय कर सकती है।

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