निर्दलियों के भरोसे अब बीजेपी-कांग्रेस, निगम-परिषद-पालिका...बोर्ड बनाने के लिए दूसरों का मुंह ताकतीं ताकतवर पार्टी

राजस्थान के 10 नगर निगमों में से बीजेपी ने जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में बहुमत हासिल किया। वहीं बीकानेर में कांग्रेस को बहुमत मिला। दूसरी तरफ भरतपुर, पाली, अलवर, अजमेर और जोधपुर में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। यहां पर अब बीजेपी-कांग्रेस निर्दलियों के भरोसे हैं।
नगर निगमों के अलावा 18 नगर परिषद, 122 नगर पालिकाओं में भी बीजेपी और कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला। ऐसे में निर्दलियों और BAP, BSP, AAP, RLP के जीते हुए प्रत्याशियों को अपने तरफ लाने के लिए दोनों ही पार्टियों में जबरदस्त लड़ाई देखने को अब मिल सकती है।
यहां गौर करने वाली बात ये है कि बीजेपी के वोट अपेक्षाकृत ज्यादा वार्डों में जीत में तब्दील हुए, जबकि निर्दलीयों का बड़ा वोट शेयर कई जगहों पर जीत हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।
निर्दलीयों का 27.38% वोट शेयर
राजस्थान निकाय चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक तस्वीर ये बताती है कि सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला नहीं है। बल्कि निर्दलीय भी इसमें बराबर के प्रतिभागी हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों को 29,06,787 वोट मिले, जो कुल वोटों का 27.38% है। यानी हर 100 मतदाताओं में करीब 27 ने किसी पार्टी के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार को चुना।
यह आंकड़ा बीजेपी के 35% और कांग्रेस के 34% के बाद बहुत बड़ा वोट ब्लॉक है। लेकिन निर्दलीयों का वोट पूरे प्रदेश में अलग-अलग उम्मीदवारों में बंटा हुआ था। इसलिए उनका 27.38% वोट एक पार्टी के वोट की तरह एक जगह इकट्ठा होकर वार्डों में तब्दील नहीं हो सका।
यही वजह है कि 27.38% वोट के बावजूद निर्दलीय 2,273 वार्ड जीत पाए, जबकि बीजेपी 35.18% वोट के साथ 4,179 वार्ड जीतने में सफल रही।
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