बाड़ेबंदी में मस्ती काट रहे प्रत्याशी, होटल-रिजॉर्ट्स की तस्वीरें वायरल, इधर नतीजों को लेकर बीजेपी-कांग्रेस का गर्मा रहा माथा

राजस्थान में निकाय चुनाव 2026 के दोनों चरणों की वोटिंग खत्म हो चुकी है, लेकिन सियासी हलचल थमने के बजाय और तेज हो गई है। अब बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने प्रत्याशियों को ‘सुरक्षित’ रखने की कवायद में जुट गई हैं। कई जिलों में प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू हो चुकी है और उन्हें महंगे होटल, रिसॉर्ट और दूसरे सुरक्षित ठिकानों पर ले जाया गया है।
मतदान के बाद अब असली चिंता बोर्ड बनाने की है। यही वजह है कि दोनों प्रमुख पार्टियां अपने पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने के साथ-साथ संभावित निर्दलीय पार्षदों पर भी नजर बनाए हुए हैं। हाड़ौती से लेकर अलवर, ब्यावर और दूसरे शहरों तक बाड़ेबंदी की तस्वीरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई जगह प्रत्याशियों को बसों और निजी वाहनों से शहर से बाहर ले जाया गया है।
कहीं होटल में ठहराव, कहीं स्विमिंग पूल में मस्ती
बाड़ेबंदी का मकसद भले ही राजनीतिक रूप से प्रत्याशियों को ‘सेफ’ रखना हो, लेकिन होटल और रिसॉर्ट में रहने के दौरान प्रत्याशियों के आराम और मौज-मस्ती की तस्वीरें भी सामने आ रही हैं।
भोपालगढ़ और ब्यावर जैसी जगहों से प्रत्याशियों के होटल-रिसॉर्ट में ठहरने और स्विमिंग पूल में मस्ती करते हुए फोटो-वीडियो सामने आने की चर्चा है। यानी एक तरफ पार्टियां अपने प्रत्याशियों को टूटने से बचाने और राजनीतिक समीकरण साधने में लगी हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रत्याशी चुनावी थकान उतारते नजर आ रहे हैं।
बाड़ेबंदी की ये कवायद सिर्फ एक पार्टी तक सीमित नहीं है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने प्रत्याशियों को सुरक्षित ठिकानों पर रखने में जुटी हैं। बारां और हाड़ौती में भी मतदान के तुरंत बाद प्रत्याशियों को सीक्रेट जगहों पर भेजे जाने की खबरें सामने आई हैं।
अलवर में बाड़ेबंदी के बीच हंगामा, वन अधिकारियों के साथ पहुंचे बीजेपी कार्यकर्ता
अलवर में कांग्रेस की बाड़ेबंदी के दौरान मामला उस वक्त गरमा गया, जब कथित तौर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं के वन अधिकारियों के साथ वहां पहुंचने की बात सामने आई। इस दौरान वार्ड 22 के निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप मीणा को अपने साथ ले जाने को लेकर करीब तीन घंटे तक हंगामा चला।
घटना को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। हालांकि, बाद में कुलदीप मीणा की तरफ से कहा गया कि उनके परिवार का एक सदस्य बीमार है और उसे देखने के लिए वह बाहर आए हैं। ऐसे में पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
अलवर में कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को होटल में जुटाया है और पार्टी नेताओं की तरफ से बोर्ड बनाने का दावा भी किया गया है। वहीं बीजेपी भी अपने प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने की कवायद कर रही है।
निर्दलीयों पर भी नजर, बोर्ड बनाने में हो सकते हैं ‘किंगमेकर’
निकाय चुनाव में सबसे ज्यादा अहमियत अब उन सीटों की हो गई है, जहां बीजेपी और कांग्रेस में से किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता। ऐसे में निर्दलीय पार्षद दोनों पार्टियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
यही वजह है कि कई शहरों में निर्दलीय प्रत्याशियों को लेकर भी दोनों दल सक्रिय हैं। अलवर में भी कई वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों के समीकरण बिगाड़ने की चर्चा चुनाव से पहले ही थी। अब मतदान के बाद इनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
14 सितंबर को खुलेगा ‘बाड़ेबंदी’ का राज
राजस्थान के निकाय चुनाव के नतीजे 14 सितंबर को सामने आएंगे। तब पता चलेगा कि किस पार्टी के कितने पार्षद जीतकर आते हैं और किसे बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों या दूसरे दलों के पार्षदों की जरूरत पड़ती है।
फिलहाल बीजेपी और कांग्रेस दोनों अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहतीं। इसलिए चुनाव खत्म होने के बाद राजस्थान की राजनीति का नया नजारा सामने है—एक तरफ मतपेटियों में बंद जनादेश है और दूसरी तरफ होटल-रिसॉर्ट में चल रही ‘बाड़ेबंदी की राजनीति’। अब नजर 14 सितंबर पर है, जब वोटों की गिनती के साथ यह भी साफ होगा कि किसका ‘होटल प्लान’ काम आया और किसके प्रत्याशी बोर्ड बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में जीतकर लौटे।
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