राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी के साथ कांग्रेस के दिग्गज भी अपने गढ़ में फेल, पायलट-गहलोत समेत कई नेताओं को झटका

जयपुर: राजस्थान के निकाय चुनाव के नतीजों ने सिर्फ बीजेपी के दिग्गज नेताओं के लिए ही सवाल खड़े नहीं किए हैं, बल्कि कांग्रेस के बड़े नेताओं के प्रभाव और जमीनी पकड़ की भी परीक्षा हुई है। कई ऐसे कांग्रेस नेता हैं, जो अपने विधानसभा क्षेत्र, प्रभाव क्षेत्र या यहां तक कि अपने ही वार्ड में पार्टी प्रत्याशी को जीत नहीं दिला पाए।
सबसे ज्यादा चर्चा अशोक गहलोत, सचिन पायलट, टीकाराम जूली, डॉ. सीपी जोशी, जितेंद्र सिंह और विश्वेंद्र सिंह जैसे नेताओं के इलाकों के नतीजों की हो रही है। हालांकि, कुछ नेताओं के विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत भी रहा।
अशोक गहलोत के गृह वार्ड में बीजेपी का झटका
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र में भी बीजेपी ने कांग्रेस को झटका दिया। वार्ड नंबर 88 में बीजेपी ने जीत दर्ज की।
हालांकि, जोधपुर निगम के स्तर पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा। ऐसे में गहलोत के गृह वार्ड का परिणाम स्थानीय राजनीति में खास चर्चा का विषय बन गया है।
सचिन पायलट के अपने वार्ड में बीजेपी की जीत
टोंक विधायक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट के लिए अपने ही वार्ड का नतीजा झटका देने वाला रहा। पायलट के वार्ड नंबर 97 में बीजेपी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।
हालांकि, पूरे टोंक नगर परिषद की तस्वीर कांग्रेस के पक्ष में रही। टोंक में कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल किया। ऐसे में पायलट के अपने वार्ड में बीजेपी की जीत को स्थानीय स्तर पर अलग नजरिए से देखा जा रहा है।
टीकाराम जूली के प्रभाव क्षेत्र में बीजेपी ने मारी बाजी
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के प्रभाव वाले इलाके में भी कांग्रेस को झटका लगा। वार्ड नंबर 29 में बीजेपी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।
बताया गया कि नe तो संबंधित बूथ कांग्रेस के पक्ष में गया और न ही वार्ड में पार्टी जीत हासिल कर सकी। बीजेपी की इस जीत के बाद स्थानीय सियासी समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
शांति धारीवाल के वार्ड में कांग्रेस जीती, लेकिन बूथ पर बीजेपी आगे
कोटा में कांग्रेस के दिग्गज नेता शांति धारीवाल के विधानसभा क्षेत्र में तस्वीर थोड़ी अलग रही। वार्ड नंबर 41 से कांग्रेस के मंगल तम्बोली ने जीत दर्ज की, लेकिन संबंधित बूथ पर बीजेपी प्रत्याशी को बढ़त मिली।
धारीवाल के विधानसभा क्षेत्र में कुल 30 वार्ड हैं। ऐसे में वार्ड जीतने के बावजूद अपने बूथ पर बीजेपी का आगे निकलना कांग्रेस के लिए स्थानीय संगठन और वोट मैनेजमेंट के लिहाज से महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।
जितेंद्र सिंह के अपने वार्ड में बीजेपी की जीत
पूर्व मंत्री जितेंद्र सिंह को भी अपने वार्ड में झटका लगा। उनके वार्ड नंबर 36 में बीजेपी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। यहां संबंधित बूथ भी कांग्रेस के पक्ष में नहीं गया। अपने प्रभाव क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी की हार को स्थानीय स्तर पर पार्टी की पकड़ कमजोर होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सीपी जोशी के वार्ड में भी कांग्रेस हारी
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी नाथद्वारा के वार्ड नंबर 21 से आते हैं। उनके अपने वार्ड में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और बीजेपी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। नाथद्वारा को कांग्रेस के मजबूत इलाकों में गिना जाता रहा है। ऐसे में अपने ही वार्ड में बीजेपी की जीत ने कांग्रेस के लिए चिंता बढ़ाई है।
प्रमोद जैन भाया के वार्ड में कांग्रेस तीसरे नंबर पर
बारां से विधायक और पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया के लिए भी अपने निवास वाले इलाके का नतीजा चुनौतीपूर्ण रहा। वार्ड नंबर 34 में कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही, जबकि यहां आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। भाया का वोट ग्रामीण क्षेत्र में माना जाता है, लेकिन उनके निवास वाले वार्ड में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहना पार्टी के लिए स्थानीय स्तर पर चिंता का विषय है।
विश्वेंद्र सिंह के वार्ड में निर्दलीय की जीत
भरतपुर के विधायक विश्वेंद्र सिंह के अपने वार्ड नंबर 48 में भी कांग्रेस को हार मिली। यहां कांग्रेस प्रत्याशी रामेश्वर सैनी को हार का सामना करना पड़ा, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह विजयी रहे। निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने कांग्रेस के भीतर पार्टी से नाराजगी और वोटों के बिखराव जैसे सवाल खड़े किए हैं।
कुछ दिग्गजों के क्षेत्रों में कांग्रेस का मजबूत प्रदर्शन
हर जगह कांग्रेस के लिए तस्वीर निराशाजनक नहीं रही। गोविंद सिंह डोटासरा के निवास क्षेत्र सीकर में कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत रहा और पार्टी ने यहां जीत हासिल की। इसी तरह पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के इलाके में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया। उनके संबंधित बूथ पर कांग्रेस आगे रही और वार्ड में कांग्रेस की सरिता व्यास ने जीत दर्ज की। उनके विधानसभा क्षेत्र के कुल 39 वार्डों में कांग्रेस ने 23 सीटें जीतीं।
निकाय चुनाव ने दिग्गजों की जमीनी पकड़ पर उठाए सवाल
राजस्थान निकाय चुनाव का यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निकाय चुनाव में प्रत्याशी के साथ-साथ स्थानीय संगठन, बूथ मैनेजमेंट और नेता की व्यक्तिगत पकड़ भी अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में बड़े नेताओं के अपने वार्ड में हारने या बूथ पर पिछड़ने के नतीजे उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता का सीधा पैमाना तो नहीं हैं, लेकिन स्थानीय संगठन की स्थिति और वोटों के बिखराव का संकेत जरूर दे सकते हैं।
ये भी पढ़ें- राजस्थान निकाय चुनाव 2026: CM से पूर्व CM तक...दिग्गजों के गढ़ में BJP को झटके, निर्दलीयों ने बिगाड़ा गणित
इस लिंक को शेयर करें

