राजस्थान छात्रसंघ चुनावों की मांग के बीच असम में बाढ़ पीड़ितों के साथ दिखे निर्मल चौधरी

राजस्थान में इन दिनों छात्रसंघ चुनाव को लेकर माहौल गरम है। छात्र नेता लगातार सवाल उठा रहे हैं, प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से पूछ रहे हैं कि आखिर छात्रसंघ चुनाव होंगे कब? लेकिन इस पूरे बवाल के बीच एक नाम ऐसा है, जिसे लेकर छात्र लगातार सवाल पूछ रहे हैं कि भाई... निर्मल चौधरी कहां हैं? क्योंकि निर्मल चौधरी का नाम छात्र राजनीति में किसी पहचान का मोहताज नहीं है।
छात्रों से जुड़े छोटे से छोटे मुद्दे पर मुखर होना, सोशल मीडिया पर आवाज उठाना, प्रदर्शन करना और सरकार को घेरना...ये सब निर्मल चौधरी के राजनीतिक अंदाज का हिस्सा रहा है। ऐसे में जब इस वक्त छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा इतना बड़ा बना हुआ है, तो लोगों को उनका मैदान से गायब होना थोड़ा अजीब लगा।
राजस्थान छोड़कर असम पहुंचे हैं निर्मल चौधरी
छात्र पूछने लगे कि हर मुद्दे पर बोलने वाले निर्मल चौधरी इस मुद्दे पर कहां हैं? तो भाई पता चल गया है ...और कहानी थोड़ी अलग है। निर्मल चौधरी इस वक्त राजस्थान में नहीं हैं। वो पहुंचे हुए हैं असम....जी हां, राजस्थान की छात्र राजनीति से दूर निर्मल चौधरी इस समय असम में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच नजर आ रहे हैं।
बाढ़ पीड़ितों पर जरुरत का सामान पहुंचा रहे हैं निर्मल चौधरी
बाढ़ के पानी के बीच नाव से घूमते हुए उनके वीडियो सामने आए हैं। वीडियो में वो जरूरतमंद लोगों के बीच बर्तन बांटते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। यानी एक तरफ राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव को लेकर सियासी और छात्र राजनीति का पारा चढ़ा हुआ है। और दूसरी तरफ निर्मल चौधरी असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों के बीच पहुंचकर मदद करते नजर आ रहे हैं।
वहां लोकल लोग भी उनसे मिल रहे हैं, उनसे सामान ले रहे हैं और उन्हें दुआएं-आशीर्वाद देते दिखाई दे रहे हैं।
राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव की मांग पर मचा हल्ला
अब यहां सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि निर्मल चौधरी राजस्थान में क्यों नहीं हैं? सवाल ये भी है कि क्या छात्रसंघ चुनाव जैसे बड़े मुद्दे पर उनकी गैरमौजूदगी छात्रों को खल रही है? क्योंकि छात्र राजनीति में निर्मल चौधरी की एक खास पहचान रही है और ऐसे समय में जब छात्र नेता लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं, उनकी मौजूदगी की उम्मीद भी स्वाभाविक है।
अब सवाल ये है कि असम से लौटने के बाद क्या निर्मल चौधरी फिर से छात्रसंघ चुनाव के मुद्दे पर एक्टिव होंगे? क्या वो छात्रों की इस मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे? ये तो आने वाला वक्त बताएगा।
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