झारखंड छात्रों आंदोलन में नेहा बोरा पर स्याही फेंकने के मामले में राजकुमार रोत का बयान

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में छात्रों का आंदोलन चल रहा है। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान ये छात्र कर चुके हैं और सरकार से जवाब मांग रहे हैं। शनिवार को सरकार से बात हुई लेकिन उनकी मांगों पर सहमति नहीं बनी।
वहीं इसी आंदोलन के बीच राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर से सांसद राजकुमार रोत का एक बयान अब सवाल खड़े कर रहा है। सवाल ये नहीं कि उन्होंने बयान क्यों दिया? सवाल ये है कि उन्होंने बयान कब दिया और किसके लिए दिया? क्योंकि झारखंड के छात्र जब आंदोलन कर रहे थे, तब राजकुमार रोत की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया। लेकिन जैसे ही AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकने की घटना हुई, राजकुमार रोत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी।
रोत ने की कार्रवाई की मांग
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पेपर लीक के खिलाफ छात्र शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा मार्च कर रहे थे और युवाओं की आवाज उठाने वाली AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकना बेहद निंदनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कार्रवाई की मांग भी कर दी। साथ ही ये भी कहा कि छात्रों की मांग पर भी फैसले लें।
झारखंड के छात्रों ने नेहा बोरा को मंच से उतारा
अब यहां सवाल उठता है कि झारखंड के छात्रों के आंदोलन पर चुप्पी लेकिन AISA की नेता पर स्याही पड़ते ही बयान? और यहीं से विवाद और गहरा जाता है। क्योंकि झारखंड के छात्रों का दावा है कि उनका आंदोलन पहले से तय था और 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान भी किया गया था। इन छात्रों ने पहले ही कई बार साफ-साफ कहा है कि आंदोलन में किसी राजनीतिक दल या कथित राष्ट्रविरोधी विचारधारा से जुड़े लोगों के शामिल होने की अनुमति है। लेकिन इसी बीच पहुंच गईं नेहा बोरा... छात्रों का दावा है कि मंच पर पहुंचकर वो आजादी के नारे लगवाने लगी थीं, जिससे छात्र गुस्सा गए और उन्हें मंच से नीचे उतार दिया गया।
आंदोलन पर क्यों कुछ नहीं कहा रोत ने?
सोशल मीडिया पर एक वर्ग के लोगों का कहना है कि अगर राजकुमार रोत छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन और उनकी जायज मांगों के समर्थन में हैं तो फिर झारखंड के छात्रों के मूल आंदोलन के दौरान उनकी आवाज क्यों नहीं सुनाई दी? क्या उन्हें पेपर लीक और छात्रों की परेशानी तब याद नहीं आई?
क्या छात्र आंदोलन का समर्थन मुद्दे के आधार पर होगा या चेहरे और संगठन देखकर, स्याही फेंकना गलत है तो उसका विरोध होना चाहिए। लेकिन उसी के साथ छात्रों की मूल मांग, उनके आंदोलन और उनके आरोपों पर भी उतनी ही मजबूती से बात होनी चाहिए।
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