आमेर गाइड मर्डर के बाद जयपुर में बवाल: बाजार बंद, महल जाने वाले रास्ते रोके, छावनी में बदला इलाका

Jaipur: आमेर में टूरिस्ट गाइड मनीष सोनी की मौत के बाद मंगलवार को पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। सोमवार को चाकू के हमले में गंभीर घायल हुए मनीष ने मंगलवार को SMS अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मौत की खबर आमेर पहुंचते ही स्थानीय लोगों, व्यापारियों और गाइड समुदाय का गुस्सा फूट पड़ा। विरोध में आमेर के बाजार बंद कर दिए गए हैं और आमेर महल की तरफ जाने वाले रास्तों को भी रोक दिया गया है। इलाके में भारी पुलिस जाब्ता तैनात है।
बाजार बंद, सड़कों पर उतरे लोग
मनीष की मौत के बाद आमेर में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और गाइड समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने बाजार बंद करवाए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। आमेर थाने के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
आमेर महल जाने वाला रास्ता भी बंद
विरोध प्रदर्शन के चलते आमेर महल की तरफ जाने वाले मुख्य रास्ते पर आवाजाही प्रभावित है। पर्यटकों की आवाजाही और हाथी सवारी भी रोक दी गई है। इससे आमेर के पर्यटन कारोबार पर भी असर पड़ा है।
आमेर जयपुर का प्रमुख पर्यटन केंद्र है और रोजाना बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं। ऐसे में रास्ते बंद होने से पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गाड़ी किले तक ले जाने को लेकर हुआ था विवाद
मामला सोमवार सुबह मावठा सरोवर के पास शुरू हुआ था। रिपोर्टों के मुताबिक गाइड मनीष सोनी और जीप चालक आजम के बीच गाड़ी को आमेर किले की तरफ ले जाने को लेकर कहासुनी हुई थी। विवाद बढ़ने के बाद मनीष के पेट में जीप चालक आजम ने अपने एक और मुस्लिम साथी के साथ मिलकर उसके पेट में चाकू घोंप दिया। गंभीर हालत में मनीष को SMS अस्पताल ले जाया गया, जहां मंगलवार को इलाज के बाद मंगलवार को उनकी मौत हो गई।
दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में
पुलिस ने इस मामले में जीप चालक आजम और उसके साथी नाजिश को हिरासत में लिया है। पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है और वारदात में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक आजम के खिलाफ आमेर थाने में पहले से दो मामले दर्ज हैं।
एनकाउंडर और योगी के बुलडोजर की तर्ज पर कार्रवाई की मांग
मनीष की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें एक करोड़ रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, आरोपियों के एनकाउंटर, उनके घर पर बुलडोजर कार्रवाई जैसी मांगें शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और आमेर में अवैध या अनधिकृत जीप संचालन पर रोक लगाने की मांग भी उठाई है।
वहीं, कुछ प्रदर्शनकारियों ने आमेर पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। गाइड समिति के लोगों का कहना है कि ये मुस्लिम लोग अपनी जीप में जबरदस्ती लोगों को बिठाते हैं और किले तक छोड़ने की बात करते हैं जिसकी तो परमिशन भी नहीं है। इस पर पहले ही कहासुनी हो चुकी है। इसलिए इन लोगों ने इस तरह की पूरी साजिश रची कि गाइड को मारना है, तभी तो वे अपने साथ धारदार हथियार लेकर आए। उनका कहना है कि इसी को लेकर दो दिन पहले मनीष ने पुलिस में शिकायत दी थी।
आमेर में पुलिस छावनी जैसा माहौल
विरोध और तनाव को देखते हुए आमेर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। प्रशासन के सामने एक तरफ प्रदर्शनकारियों को शांत करना और दूसरी तरफ आमेर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल में कानून-व्यवस्था बनाए रखना चुनौती है।
खास बात ये है कि 9 सितंबर को राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के पहले चरण का मतदान भी होना है। ऐसे में आमेर में बिगड़े हालात ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इलाके में स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि विरोध प्रदर्शन के बीच कानून-व्यवस्था बनी रहे और आमेर में स्थिति जल्द सामान्य हो।
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