ग्रामीणों की खून-पसीने की कमाई पर सरकार की नजर! गहलोत और बेनीवाल ने जताया विरोध, जानें क्या है मामला?

Jaipur: क्या अब गांवों में रहना भी महंगा होने वाला है? क्या अब ग्रामीण आंचल में रहने वाले हर परिवार को अपनी जेब से 'जुर्माना' या टैक्स देना होगा? जी हां, राजस्थान की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है। सरकार एक ऐसा नियम लाने की तैयारी में है, जिसने राजस्थान के ग्रामीण इलाकों से लेकर जयपुर के सियासी गलियारों तक में खलबली मचा दी है।
क्या है सरकार का प्लान?
दरअसल 16वें वित्त आयोग के नए नियमों के मुताबिक, ग्राम पंचायतों को मिलने वाले बजट को दो हिस्सों में बांट दिया गया है- 80% बेसिक ग्रांट और 20% परफॉर्मेंस ग्रांट। अब पेंच फंसा है इसी 20% परफॉर्मेंस ग्रांट में। नियम ये कहता है कि अगर किसी ग्राम पंचायत को अपना पूरा फंड चाहिए, तो उसे पिछले साल के मुकाबले अपनी खुद की कमाई बढ़ानी होगी। गाइडलाइन के मुताबिक, ये वसूली इस तरह प्लान की जाएगी कि पंचायत क्षेत्र में न्यूनतम 1200 रुपए प्रति परिवार हर साल टैक्स इकट्ठा किया जा सके।
अशोक गहलोत ने सरकार पर साधा निशाना
अब जैसे ही ये फरमान सामने आया, विपक्ष को सरकार को घेरने का बड़ा मौका मिल गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
अशोक गहलोत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि "ये सरकार जनता को राहत देने के बजाय उन पर महंगाई और टैक्स का बोझ लाद रही है। गांवों के विकास के बजट को इस तरह शर्तों में बांधना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने जैसा है।"
बेनीवाल ने कहा- आंदोलन होगा
RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने तो सीधे आंदोलन की चेतावनी दे दी है। बेनीवाल ने कहा "गांवों के गरीब परिवारों से 1200 रुपए सालाना टैक्स वसूलने का ये तुगलकी फरमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर सरकार ने ये फैसला वापस नहीं लिया, तो RLP सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।"
अब सवाल ये उठता है कि जो ग्रामीण इलाका पहले से ही मौसम की मार, खेती की लागत और महंगाई से जूझ रहा है, क्या उस पर इस तरह का टैक्स डालना जायज है? क्या विकास कार्यों का बजट रोकने की धमकी देकर जनता की जेब काटना लोकतंत्र की सही परिभाषा है?
एक तरफ सरकार गांवों के विकास के दावे करती है, और दूसरी तरफ गांवों के ही बजट पर 20% की कैंची चलाने की तैयारी हो रही है। अब देखना ये होगा कि चौतरफा घिरने के बाद क्या सरकार इस फैसले पर कदम पीछे खींचती है, या फिर राजस्थान के गांवों में टैक्स को लेकर एक नया संग्राम छिड़ने वाला है।
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