क्या BAP कार्यकर्ताओं ने जबरदस्ती की है कांग्रेस ज्वाइन या फिर डोटासरा की नाराजगी से बच रहे गहलोत, बयानबाजियों ने मचाई हलचल

राजस्थान कांग्रेस पर जो बीजेपी लंबे समय से लगातार गुटबाजी का आरोप लगाती रही है और कांग्रेस इससे पल्ला झाड़ती रही है उस पर इस बार खुद कांग्रेस भी कंट्रोल नहीं कर पाई। भारत आदिवासी पार्टी के 309 कार्यकर्ताओं की कांग्रेस ज्वाइनिंग से शुरु हुआ खेल अब सियासी हंगामे का रूप लेने लगा है। जबसे महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने बीजेपी से दोबारा कांग्रेस ज्वाइन की है तभी से पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच सियासी तनातनी की चर्चाओं से गरमाई हुई है।
गहलोत बोले- BAP वाले तो मिलने आए थे कोई ज्वाइनिंग नहीं थी
डोटासरा के इस कड़े तेवर और तीखे बयानों के बाद कांग्रेस में एक नया घमासान शुरू हो गया है, तब अशोक गहलोत का रिएक्शन सामने आया, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। मीडिया के सामने आते ही गहलोत ने पूरे विवाद पर बिल्कुल नरम और हैरान करने वाला रुख अपनाया। गहलोत ने सफाई देते हुए कहा कि वे तो बस मिलने आए थे, ये कोई आधिकारिक 'ज्वाइनिंग' नहीं थी।
गहलोत ने कहा कि मुझे कहा गया भाई वो जिद किए हुए हैं बच्चे, बीस - पच्चीस दिन से बात चल रही थी। मैं मना कर रहा था, यहां आने की जरूरत नहीं है। मैं खुद आऊंगा बांसवाड़ा तब मिल लेंगे बच्चों से। अब 500 किलोमीटर बस लेकर कोई आए तो मुझे अजीब लगता है और मैं हमेशा डिस्करेज करता हूं। कल की बात छोड़ दीजिए। जब कभी कोई मुझसे मिलने की बात करते हैं तो मैं मना करता हूं, इतनी दूर से क्यों आ रहे हो?
'मालवीय ने जिद की आप मिल लीजिए एक बार'
गहलोत ने आगे कहा कि इन लोगों ने जिद पकड़ ली कि नहीं, हमें तो मिलना ही है। तो जब मालवीय ने बार बार कहा तो फिर अल्टीमेटली मैंने कहा कि भाई ठीक मिला दीजिए। तो मिलने मुझसे भी आए थे, तो मुझसे मिलना है तो मैंने भी कहा और उनके खुद ने भी टाइम ले लिया था। पीसीसी से भी कि हम जाकर वहां भी आशीर्वाद लेंगे, मिल लेंगे अध्यक्ष जी से मिलेंगे और कोई बात थी ही नहीं। ना ज्वाइनिंग की थी, ना चर्चा हुई ज्वाइनिंग की और वो तो कार्यकर्ता थे। ज्वाइनिंग नेताओं की होती है। जो आंकड़े बता रहे हैं अब 400 कार्यकर्ता वो तो गए और कब वापस आए।
ना पीसीसी चीफ नाराज हैं और ना मैं- गहलोत
गहलोत ने कहा कि कोई नाराजगी नहीं है,कोई नाराजगी ना पीसीसी अध्यक्ष को, ना मुझे है। अध्यक्ष जी क्या नाराजगी बताएंगे? कोई नाराजगी नहीं बताई उन्होंने। उनको तो जो महसूस हुआ, उन्होंने बता दी बात। इसमें कोई आपस में मनमुटाव, झगड़ों का कोई स्थान होना ही नहीं चाहिए।
दरअसल पूरा मामला तब शुरू हुआ जब हाल ही में पूर्व मंत्री महेंद्रजीत मालवीया के साथ कुछ कार्यकर्ता जयपुर में अशोक गहलोत से मिलने पहुँचे। इस दौरान वहाँ 'अशोक गहलोत चौथी बार' के नारे गूँजने लगे। जब यही कार्यकर्ता इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मिलने पहुँचे, तो डोटासरा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उन्होंने मालवीया के सामने ही कड़ी नाराजगी जताते हुए साफ शब्दों में कह दिया कि जो लोग पार्टी के बजाय सिर्फ अपनी व्यक्तिगत ब्रांडिंग करते हैं, उन्हीं की वजह से पार्टी पहले भी चुनाव हारी है। डोटासरा के इस तीखे तेवर से साफ हो गया था कि कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
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