Jaipur: बगरू में स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे CJP कार्यकर्ताओं को ग्रामीणों ने बाहर निकाला, आशुतोष रांका बोले- ये गांव वाले नहीं बीजेपी के गुंडे

Jaipur: राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत शुक्रवार को बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में कार्यकर्ता पहुंचे तो ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। गांव वालों ने CJP कार्यकर्ताओं से धक्का-मुक्की करके उन्हें स्कूल से बाहर निकाल दिया। इसके बाद ये गांव वाले खुद धरने पर बैठ गए। इस पर CJP संयोजक आशुतोष रांका ने कहा कि ये गांव वाले नहीं है बल्कि बीजेपी के भेजे हुए गुंडे हैं। रांका ने स्कूल पहुंचने की बात भी कही है।
CJP ने पहले ही किया था स्कूल पहुंचने का ऐलान
दरअसल, सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और फोटो-वीडियोग्राफी को लेकर राजस्थान में विवाद के बीच आशुतोष रांका ने ऐलान किया था कि उनकी टीम 21 अगस्त को जयपुर के दो सरकारी स्कूलों का दौरा करेगी।
इनमें पहला दौरा सुबह 8 बजे बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय का था। इसके बाद टीम को वाटिका रोड स्थित भट्टा वाला सरकारी स्कूल जाना था। रांका ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा था कि अगर स्कूलों में जाने पर मुकदमा दर्ज करना है या गिरफ्तार करना है तो सरकार ऐसा कर सकती है, लेकिन टीम स्कूलों का दौरा करेगी।
स्कूल पहुंची टीम तो ग्रामीणों ने कर दिया विरोध
शुक्रवार को CJP की टीम रामपुरा-कंवरपुरा के स्कूल पहुंची। यहां ग्रामीण पहले से ही विरोध में नजर आए। ग्रामीणों ने CJP कार्यकर्ताओं को स्कूल से बाहर कर दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने CJP के खिलाफ धरना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी बाहरी व्यक्ति को गांव और स्कूल में घुसने नहीं देंगे। उनका तर्क है कि गांव और स्कूल से जुड़े मामलों में बाहरी संगठन के लोगों का दखल मंजूर नहीं है।
रामपुरा, कंवरपुरा स्थित सरकारी स्कूल पिछले कई सालों से भैंसों के तबेले में चल रहा है। मैं अभी वही पहुँच रहा हूँ।
लेकिन हमारी टीम के कुछ साथी जो वहाँ पहुचे हुए थे, उनके साथ भाजपा के गुंडे फिर मारपीट पर उतर आए।
भाजपा को हमारे बच्चे भैंसों के तबेले में पढ़ते रहे, यह मंज़ूर है,… pic.twitter.com/OYYThDjKgB
— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) August 21, 2026
CJP का आरोप- बीजेपी के लोगों ने किया विरोध
इस घटना के बाद आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि विरोध करने वाले लोग स्थानीय ग्रामीण नहीं, बल्कि बीजेपी से जुड़े लोग थे, वो बीजेपी के गुंडे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी टीम के साथ मारपीट और हाथापाई की गई। साथ ही कहा कि स्कूल पिछले कई सालों से भैंसों के तबेले में चल रहा है। मैं अभी वही पहुंच रहा हूँ।
रांका ने ये भी आरोप लगाया कि इनका सरगना कमल प्रधान गरीब लोगों की ज़मीन पर कब्जे का काम करता है। बच्चों को भैंसों में तबेले में पढ़ाया जा रहा है, और ये रोकने पर भाजपा अपने गुंडे भेज रही है।
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका रामपुरा कंवरपुरा स्कूल आने वाले हैं। इससे पहले कुछ लोग यहां इकट्ठा होकर उनका और पार्टी का विरोध कर रहे हैं। विरोध किस बात का कर रहे हैं, यह बात साफ नहीं है। पार्टी का विरोध है, व्यक्ति का विरोध है, स्कूल बनने देने का विरोध है। pic.twitter.com/cRqfmd4xQ5
— Vishwas Sharma (@VishwasSharma_) August 21, 2026
जिस स्कूल में CJP पहुंची, उसकी हालत पहले भी सवालों में रही
रामपुरा-कंवरपुरा का ये स्कूल पहले से ही अपनी जर्जर हालत को लेकर चर्चा में रहा है। करीब डेढ़ साल पहले 'महानगर टाइम्स ' की पब्लिश एक रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल भवन की छत की पट्टियां क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं और दीवारों में दरारें थीं। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के चलते बच्चों को परेशानी होती थी और कई बार बारिश में छुट्टी तक करनी पड़ती थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये स्कूल 1985 से चल रहा है। कभी यहां करीब 60 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन बच्चों की संख्या घटकर करीब 18 रह गई थी। ग्रामीणों ने उस समय भी स्कूल की मरम्मत के लिए जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही थी।
स्कूल की बदहाली से ज्यादा अब एंट्री को लेकर विवाद
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प पहलू ये है कि विवाद की शुरुआत सरकारी स्कूल की हालत से हुई थी, लेकिन अब सवाल स्कूल में बाहरी लोगों की एंट्री का बन गया है।
CJP का कहना है कि वह किसी राजनीतिक कार्यक्रम के लिए नहीं बल्कि सरकारी स्कूलों की असली हालत सामने लाने के लिए निरीक्षण कर रही है। वहीं राजस्थान सरकार की तरफ से स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों की एंट्री और फोटो-वीडियोग्राफी को लेकर पहले ही नियम कड़े किए गए हैं। ऐसे में रामपुरा-कंवरपुरा की घटना राजस्थान में चल रहे सरकारी स्कूलों की निगरानी बनाम स्कूल परिसरों में बाहरी दखल के विवाद को नया मोड़ दे रही है।
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