बीकानेर में BJP विधायक का शर्मनाक बयान, कैबिनेट मंत्री के सामने जनता से बोले – तब मर गए थे क्या?

Bikaner: राजस्थान में नेताओं के बोल बिगड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कभी जनता की सुरक्षा का वादा करने वाले ये नेता अब अपनों को खो चुकी जनता के जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं। ताजा मामला बीकानेर से है, जहां श्रीडूंगरगढ़ में एक जनसुनवाई के दौरान बीजेपी विधायक ताराचंद सारस्वत ने संवेदनशीलता की सारी हदें पार कर दीं।
सड़क हादसे में 6 लोगों की चली गई थी जान,
श्रीडूंगरगढ़ के पंचायत समिति भवन में बीते दिन दोपहर 3 बजे कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा जनता की समस्याएं सुन रहे थे। उसी दिन श्रीडूंगरगढ़ में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ था, जिसमें 6 मासूम लोगों की जान चली गई थी। (RLP) के नेता विवेक माचरा ने जनता की आवाज उठाते हुए कहा कि 'मुख्यमंत्री ने यहां ट्रोमा सेंटर बनाने का वादा किया था, लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी ट्रोमा सेंटर नहीं बना।'
मानना पड़ेगा युवा नेता मुद्दों पर गंभीर भी है और कॉन्फ़िडेंट भी…
बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ से खबर
मंत्री सुमित गोदारा की जनसुनवाई में तीखी बहस
RLP नेता डॉ विवेक माचरा ने उठाए हॉस्पिटल से जुड़े मुद्दे
कहा - पिछले पाँच महीनों से सोनोग्राफी नहीं हो रही
RFT -LFT की जांचे नहीं हो… pic.twitter.com/MSX1JgPQol
— parshuram Godara (@ParshuramGodara) June 15, 2026
इस पर स्थानीय बीजेपी विधायक ताराचंद सारस्वत तारीखों का हिसाब लेकर बैठ गए। उन्होंने कहा कि आश्वासन तो जुलाई 2025 में मिला था, तो ढाई साल कैसे हो गए? जब वहां मौजूद एक आम किसान ने हक से पूछा कि 'साहब, एक साल तो हो गया ना?', तो विधायक अपना आपा खो बैठे और चिल्लाकर बोले- "3 साल डुबोए रखा था, तब मर गए थे क्या?"
मंत्री सुमित गोदारा ने संभाला माहौल
इस असंवेदनशील बयान को सुनकर वहां मौजूद RLP नेता और आम लोग भड़क गए। माहौल इतना गरमाया कि पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा। हालांकि, मौके पर मौजूद कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा ने सूझबूझ दिखाई, मामला संभाला और माना कि हादसा बेहद दुखद है और ट्रोमा सेंटर के लिए कोशिश जारी हैं लेकिन विधायक के इन कड़वे बोल ने सरकार की फजीहत करा दी है।
5 दिन पहले स्वास्थ्य मंत्री ने गर्भवती महिलाओं पर की थी भद्दी टिप्पणी
बीकानेर में मंत्रियों और विधायकों की जुबान फिसलने का यह कोई पहला मामला नहीं है। अभी ठीक 5 दिन पहले, यानी 11 जून को राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने भी संवेदनशीलता को ताक पर रख दिया था।
एक तरफ प्रसूताएं अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं, और दूसरी तरफ चिकित्सा मंत्री हैं जिन्हें उसमें 'नाचते-गाते' आने का मजाक सूझ रहा है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस इन दोनों बयानों को लेकर अब हमलावर है और सरकार को घेर रही है।
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