बीकानेर से दिल्ली तक कैंसर इंजेक्शन का ‘काला खेल’: सरकारी सप्लाई वाले Avelumab के सैंपल में मिली खतरनाक गड़बड़ी

राजस्थान के सरकारी कैंसर अस्पतालों के लिए सप्लाई किए गए महंगे कैंसर इंजेक्शन के दिल्ली के कथित ब्लैक मार्केट में मिलने के मामले में जांच ने गंभीर मोड़ ले लिया है। निर्माता कंपनी की जांच में दो संदिग्ध Avelumab सैंपल में दवा की मात्रा मानक से कम मिलने के साथ बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई है। दोनों सैंपल को कंपनी ने काउंटरफिट यानी नकली बताया है।
कैसे चली पूरी चेन ये देखिए
राजस्थान के बीकानेर स्थित आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर ट्रीटमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़ा कैंसर इंजेक्शन मामला अब सिर्फ सरकारी दवाओं की कथित ब्लैक मार्केटिंग तक सीमित नहीं रह गया है। दिल्ली क्राइम ब्रांच के जब्त किए गए Avelumab इंजेक्शन के संदिग्ध सैंपल की निर्माता कंपनी स्तर पर जांच में दवा की गुणवत्ता और संरचना को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।
24 अगस्त 2026 की Merck की एनालिटिकल रिपोर्ट में जांचे गए दो संदिग्ध Avelumab सैंपल को काउंटरफिट बताया गया। जांच में दोनों सैंपल में Avelumab की मात्रा वास्तविक रेफरेंस सैंपल के मुकाबले काफी कम मिली। इसके अलावा दोनों सैंपल स्टेरिलिटी टेस्ट में भी फेल हुए।
दिल्ली में जब्त हुई थीं 22 महंगी कैंसर दवाएं
मामला 19 अगस्त को सामने आया, जब दिल्ली क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल ने एक कथित ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 22 महंगे कैंसर और इम्यूनोथेरेपी इंजेक्शन जब्त किए। इनमें Darzalex, Imfinzi, Erbitux, Bavencio, Adcetris और Keytruda जैसी दवाएं शामिल थीं। जब्त दवाओं में Bavencio (Avelumab) 200 mg/10 ml की चार वायल ऐसी थीं, जिनका कनेक्शन राजस्थान की सरकारी सप्लाई से सामने आया। इन वायल पर बैच नंबर AU052510 दर्ज था। रिकॉर्ड के मुताबिक इस बैच का निर्माण फरवरी 2025 में हुआ था और इसकी एक्सपायरी जनवरी 2028 थी।
निर्माता कंपनी से सत्यापन के बाद इस बैच को Rajasthan Medical Services Corporation Limited (RMSCL) की सरकारी सप्लाई से जुड़ा पाया गया। RMSCL अधिकारी के अनुसार इसी बैच की दवाएं जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर के अस्पतालों को सप्लाई की गई थीं। इनमें आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट भी शामिल है।
मर्क की जांच में पैकेजिंग से लेकर दवा की संरचना तक सवाल
जांच में AU052510 बैच के संदिग्ध सैंपल की पैकेजिंग में भी असामान्यताएं मिलीं। रिपोर्ट के मुताबिक रबर स्टॉपर में करीब 1.2 mm × 0.1 mm का पंचर पाया गया, जबकि एल्युमिनियम कैप पर कई खरोंच के निशान थे। इसके बाद दवा की रासायनिक संरचना की जांच की गई। HPLC-MS टेस्ट में Avelumab की मौजूदगी तो मिली, लेकिन उसकी मात्रा असली रेफरेंस सैंपल की तुलना में काफी कम थी।
NMR जांच में भी संदिग्ध सैंपल और असली Bavencio के बीच बड़ा अंतर सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार संदिग्ध सैंपल में मैनिटोल की मात्रा करीब 1.3 प्रतिशत और एसिटिक एसिड 0.013 प्रतिशत मिला, जबकि रेफरेंस सैंपल में इनकी मात्रा 8.2 प्रतिशत और 0.092 प्रतिशत थी। इससे ये सवाल पैदा होता है कि क्या असली वायल के साथ छेड़छाड़ कर उसे दोबारा भरा गया था।
सबसे गंभीर खुलासा: इंजेक्शन में मिले बैक्टीरिया
मामले का सबसे चिंताजनक पहलू स्टेरिलिटी टेस्ट में सामने आया। Merck की जांच के मुताबिक AU052510 वाले एक संदिग्ध सैंपल में Escherichia coli (E. coli) पाया गया। दूसरे संदिग्ध Avelumab सैंपल में Serratia marcescens बैक्टीरिया मिला। दोनों सैंपल स्टेराइल नहीं पाए गए और दोनों में Avelumab की मात्रा वास्तविक दवा की तुलना में काफी कम थी।
जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि दवा की खरीद से लेकर अस्पताल तक पहुंचने और मरीज को दिए जाने तक पूरी सप्लाई चेन में कहीं कोई गड़बड़ी हुई या नहीं।
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने RMSCL से मांगे रिकॉर्ड
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने RMSCL के प्रबंध निदेशक से संबंधित बैच की खरीद, प्राप्ति, वितरण और इस्तेमाल से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। जांच एजेंसी ये भी पता करना चाहती है कि AU052510 बैच की कितनी वायल किन-किन अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को भेजी गईं और उन्हें स्वीकार करने की जिम्मेदारी किन अधिकारियों की थी।
इसके साथ ही इसकी भी जांच की जा रही है कि किसी अस्पताल या वेयरहाउस से दवा चोरी, गायब होने या गबन की कोई शिकायत पहले मिली थी या नहीं।
ये भी पढ़ें- राजस्थान निकाय चुनाव में थर्ड फ्रंट करेगा खेला! बेनीवाल-रावण-ओवैसी की तिगड़ी कर पाएगी कमाल
इस लिंक को शेयर करें

