राजस्थान निकाय चुनाव में थर्ड फ्रंट करेगा खेला! बेनीवाल-रावण-ओवैसी की तिगड़ी कर पाएगी कमाल

राजस्थान में निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। 9 और 11 सितंबर को मतदान होना है और 14 सितंबर को नतीजे सामने आ जाएंगे। करीब 1.44 करोड़ मतदाता इस बार शहर की सरकार चुनेंगे लेकिन इस बार का मुकाबला सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच पारंपरिक जंग तक सीमित नहीं दिख रहा है। बल्कि प्रदेश की सियासत में तीसरे मोर्चे की धमाकेदार एंट्री की हलचल है और इसीसे बीजेपी और कांग्रेस दोनों के खेमे में चिंता की लकीरें खींच गई हैं।
RLP, AIMIM, ASP का होगा गठजोड़?
RLP, ओवैसी की AIMIM और चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी के बीच संभावित चुनावी तालमेल की खबरें जोर पकड़ रही हैं। 14 अगस्त को RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल और ओवैसी के बीच हुई मुलाकात ने पहले ही अटकलों को हवा दे दी थी, और अब आजाद समाज पार्टी का नाम जुड़ने से नया सियासी समीकरण बनता दिख रहा है।
अगर ये गठबंधन धरातल पर उतरता है, तो इसका गणित समझिए-
RLP: मारवाड़ और ग्रामीण इलाकों के किसान व जाट वोट बैंक पर मजबूत पकड़।
आजाद समाज पार्टी: दलित और युवाओं के बीच बढ़ता प्रभाव।
AIMIM: मेवात और शहरी निकायों के मुस्लिम बहुल वार्डों में सीधा दखल।
5-10% वोट कट सकते हैं
जिन सीटों पर जीत और हार का अंतर सिर्फ कुछ सौ या हजार वोटों का होता है, वहां 5 से 10 प्रतिशत वोट काटने वाला तीसरा उम्मीदवार पूरा गेम पलट सकता है। शेखावाटी, मारवाड़ और मेवात जैसे इलाकों में यह मुकाबला सीधे त्रिकोणीय होने जा रहा है।
हालांकि, सवाल ये भी है कि क्या यह गठबंधन सिर्फ चर्चाओं तक सीमित रहेगा या बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट कर पाएगा? क्योंकि स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के चिन्ह से ज्यादा उम्मीदवार की व्यक्तिगत साख और वार्ड स्तर का संगठन मायने रखता है।
क्या ये तीसरा मोर्चा केवल वोट कटवा साबित होगा या बीजेपी-कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाकर नई इबारत लिखेगा? उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ये तस्वीर और साफ होगी।
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