Political Satire: CM को फूल तो दिया लेकिन खुशी नहीं दिखी, कैमरे ने पकड़ ली केके बिश्नोई की नाराजगी!

Rajasthan Political satire: राजनीति में कई बार शब्दों से ज्यादा चेहरे बोलते हैं और बीते दिन जयपुर एयरपोर्ट पर ऐसा ही एक चेहरा कैमरे में कैद हुआ। मौका था मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के जयपुर लौटने का, जो दिल्ली से यमुना जल समझौते पर साइन करके 'भागीरथ' बनकर लौटे थे और माहौल ऐसा था मानो पूरी सरकार ही एयरपोर्ट पर शिफ्ट हो गई हो। कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा से लेकर जोगाराम पटेल तक... सब हाथ में भारी-भरकम गुलदस्ते लिए, रीढ़ की हड्डी को 90 डिग्री पर झुकाए, 'साहब-साहब' करते हुए पलकें बिछाए खड़े थे। जैसे ही सीएम आगे बढ़ते, मंत्री जी झुकते!
लेकिन... जैसे ही इस स्वागत वाली लाइन में नंबर आया राज्य मंत्री के.के. बिश्नोई जी का, भाई साहब! वहां का तो मौसम ही बदल गया। एक गुलाब का फूल तो उन्होंने भी दिया, लेकिन चेहरे के भाव बाकी नेताओं से बिल्कुल अलग नजर आए। बिश्नोई साहब के चेहरे पर ऐसी बेरुखी थी, मानो वो मुख्यमंत्री का स्वागत करने नहीं, बल्कि सुबह-सुबह जबरदस्ती नींद से जगाकर लाइन में खड़े कर दिए गए हों!
ना चेहरे पर कोई उत्साह, ना मुंह से निकला कोई बधाई का शब्द। फूल भी उन्होंने ऐसे दिया जैसे कोई बिना मन के किसी दूर के रिश्तेदार की शादी में शगुन का लिफाफा थमाता है।
और वो मुस्कान! तो भाई साहब उस मुस्कुराहट को देखकर तो ऐसा लग रहा था कि मंत्री जी को अपने गालों की मांसपेशियों पर कितना ज़ोर लगाना पड़ रहा है। ऐसा लग रहा था मानो अंदर से अंतरात्मा चिल्ला रही हो-"नहीं हंसना भाई!" लेकिन प्रोटोकॉल कह रहा हो-"अरे हंसो मंत्री जी, कैमरा चल रहा है!"
बाकी मंत्री जहां झुक-झुक कर सीएम साहब के सामने नतमस्तक हो रहे थे, वहीं बिश्नोई जी ऐसे सीधे खड़े थे जैसे स्कूल में पीटी टीचर के सामने 'अटेंशन' की पोजीशन में खड़े हों। न झुके, न कुछ बोले, बस 'सूखा गुलाब' पकड़ाया, एक ज़बरदस्ती वाली स्माइल दी और तुरंत साइड हो गए।
अब जनता पूछ रही है कि मंत्री जी, इस गुलाब में इतनी बेरुखी क्यों? क्या यमुना का पानी आपके इलाके तक नहीं पहुंचा, या फिर इस भव्य स्वागत के ड्रामे से आपका मन अंदर ही अंदर ऊब चुका था? राजनीति में कहते हैं कि नेता की ज़ुबान जो नहीं कहती, वो उसकी बॉडी लैंग्वेज कह देती है। और बिश्नोई जी की बॉडी लैंग्वेज चिल्ला-चिल्ला कर कह रही थी-"बस बहुत हुआ, अब मुझे घर जाने दो!"
खैर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तो मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए, लेकिन के.के. बिश्नोई जी की वो 'महंगी और भारी' मुस्कान सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है।
अब ये सिर्फ चेहरे की थकान थी, कैमरे का एक पल था या फिर कोई राजनीतिक संदेश? इसका जवाब तो खुद के.के. बिष्नोई ही दे सकते हैं। लेकिन इतना जरूर है कि राजनीति में कभी-कभी एक फीकी मुस्कान भी लंबी चर्चा का विषय बन जाती है।
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