अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के खिलाफ उबल रहा राजस्थान का किसान, 7 दिन से चल रहा है धरना, सरकार चुप!

कोटपुतली में जोधपुर संघर्ष समिति कलेक्ट्रेट के बाहर बीते 7 दिनों से महापड़ाव पर बैठे हैं। कोटपूतली में देश के सबसे बड़े सीमेंट ब्रांड्स में से एक, अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के खिलाफ जोधपुर संघर्ष समिति का आंदोलन अब एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। देश की सबसे बड़ी पर्यावरण अदालत यानी एनजीटी का आदेश आ चुका है। ग्रामीणों के हक में फैसला है। बावजूद इसके, सिस्टम की कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। उससे भी बड़ा सवाल-राजस्थान की राजनीति में हर छोटे-बड़े मुद्दे पर कूदने वाले नेता इस महाआंदोलन पर मौन क्यों हैं? ना तो सरकार इस तरफ ध्यान दे रही है और ना ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत या फिर किसानों की हुंकार भरने वाले हनुमान बेनीवाल इस सुलगते मुद्दे पर अब तक कुछ बोले हैं।
आंदोलनकारी की तबियत खराब तो बेटियों ने संभाला मोर्चा
बीते दिन तो महिला आंदोलनकारी सोना योगी की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें आनन-फानन में एम्बुलेंस से BDM जिला अस्पताल भर्ती कराना पड़ा। लेकिन हौसले देखिए, जब मां की तबीयत खराब हुई, तो आंदोलन की कमान बेटियों ने संभाल ली। मेघा, खुशी, गौरी, रितिका और राधा, इन पांच बेटियों ने क्रमिक अनशन पर बैठकर हुंकार भरी है कि जब तक NGT के आदेशों की पालना नहीं होगी, वे एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगी।

ग्रामीणों के इस बढ़ते दबाव के आगे बीते मंगलवार को प्रशासन को झुकना पड़ा। SDM योगेश सिंह देवल, DSP लक्ष्मी सुथार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ संघर्ष समिति के राधेश्याम शुक्लावास और कैलाश यादव की लंबी वार्ता हुई। प्रशासन ने माना कि ग्रामीणों की मांगें और तर्क बिल्कुल सही हैं। आश्वासन दिया गया कि पुनर्वास का रास्ता जल्द निकाला जाएगा।

लिखित में जवाब आने तक नहीं हटेगा धरना
लेकिन ग्रामीण अब 'कोरे आश्वासनों' के जाल में फंसने को तैयार नहीं हैं। संघर्ष समिति ने साफ कह दिया है कि "प्रशासनिक अफसरों की मौखिक बातें बहुत सुन लीं, अब जो भी होगा लिखित में होगा।" जब तक लिखित आदेश हाथ में नहीं आता, यह महापड़ाव जारी रहेगा।
1300 दिन बीते, सरकार अब तक नहीं चेती
दूसरी तरफ सवाल ये है कि 1300 दिनों से जनता सड़क पर है। धूल, धुआं, प्रदूषण और ब्लास्टिंग से ग्रामीणों के मकानों में दरारें आ चुकी हैं। NGT ने मुआवजा और पुनर्वास तय कर दिया है, लेकिन कोटपूतली का ये दर्द अभी तक राजस्थान के बड़े नेताओं के एजेंडे में क्यों नहीं आया?
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