OBC को 27% आरक्षण की मांग, खुद का SC-ST वोटबैंक काटेगी कांग्रेस?

OBC Reservation Demand: राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस ने एक ऐसा दांव चला है, जिसने सिर्फ सियासी हलकों में ही नहीं, बल्कि आरक्षण की पूरी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह राजस्थान में OBC आरक्षण को 21 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की मांग को लेकर पूरे प्रदेश में बड़ा अभियान चलाएगी। इस मुद्दे पर 16 जुलाई को जयपुर के RIC यानी राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में कांग्रेस की OBC Advisory Council की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा समेत 66 वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
बैठक से पहले OBC विभाग के चेयरमैन हरसहाय यादव ने साफ कहा है कि कांग्रेस सामाजिक न्याय और OBC वर्ग की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए आरक्षण बढ़ाने की रणनीति तैयार करेगी।
राजस्थान में आरक्षण का ये है गणित
अब सबसे बड़ा सवाल यहीं से शुरू होता है कि क्या कांग्रेस सिर्फ OBC वोटबैंक को साधने की कोशिश कर रही है, या फिर इस मांग के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक जोखिम भी छिपा हुआ है? राजस्थान में मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक 50 प्रतिशत आरक्षण के भीतर OBC को 21 प्रतिशत, SC को 16 प्रतिशत और ST को 12 प्रतिशत आरक्षण मिलता है यानी SC-ST को कुल 28 प्रतिशत इसके अलावा MBC को 5 प्रतिशत और EWS को 10 प्रतिशत आरक्षण अलग प्रावधानों के तहत दिया गया है।
कहां से मिलेगा 21 से 27 प्रतिशत आरक्षण
अब कांग्रेस OBC आरक्षण को 21 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की बात कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि ये अतिरिक्त 6 प्रतिशत आएगा कहां से? क्या कांग्रेस 50 प्रतिशत की मौजूदा सीमा के भीतर ही कोई नया फार्मूला लाना चाहती है? अगर ऐसा है तो क्या किसी दूसरे वर्ग के हिस्से में बदलाव करना पड़ेगा? या फिर कांग्रेस 50 प्रतिशत की सीमा से आगे बढ़ने के लिए कोई संवैधानिक या कानूनी रास्ता सुझाएगी? फिलहाल कांग्रेस ने इस पर कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं रखा है।
राजस्थान के वागड़ से खिसक रहा कोर SC-ST वोटबैंक
यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में इस मांग को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब इसे लेकर राजनीतिक जानकार कह रहे हैं कि कांग्रेस लंबे समय से OBC वर्ग में अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। लेकिन दूसरी तरफ राजस्थान में SC-ST वर्ग भी कांग्रेस का पारंपरिक वोटबैंक रहा है।
ऐसे में अगर आरक्षण की इस बहस से SC-ST समाज के बीच यह संदेश जाता है कि उनके अधिकारों पर असर पड़ सकता है, तो कांग्रेस के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है। ये सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि दक्षिण राजस्थान, खासकर वागड़ क्षेत्र में कांग्रेस पिछले कुछ चुनावों में अपना जनाधार कमजोर होते हुए देख चुकी है। वहां भारतीय आदिवासी पार्टी यानी BAP तेजी से उभरी है, जबकि बीजेपी भी लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
27 प्रतिशत का फॉर्मूला क्या?
ऐसे में अगर आरक्षण का मुद्दा जातीय और सामाजिक ध्रुवीकरण की दिशा में जाता है, सियासत में बड़ा बदलाव देखा जा सकता है। हालांकि, कांग्रेस समर्थकों का तर्क है कि OBC की आबादी के अनुपात में उन्हें ज्यादा प्रतिनिधित्व और आरक्षण मिलना चाहिए, इसलिए इस मांग को सामाजिक न्याय के नजरिए से देखा जाना चाहिए। तो कांग्रेस से सवाल यही है कि 27 प्रतिशत आरक्षण देने का फॉर्मूला क्या है? क्या कांग्रेस के पास इसका संवैधानिक रोडमैप है, या फिर यह सिर्फ चुनावी राजनीति का नया दांव है? अब निगाहें 16 जुलाई की OBC Advisory Council की बैठक पर होंगी, जहां शायद इस सबसे बड़े सवाल का जवाब सामने आए। क्योंकि इस बार मुद्दा सिर्फ OBC आरक्षण का नहीं है बल्कि राजस्थान की पूरी जातीय और राजनीतिक गणित का है।
ये भी पढ़ें- मंदिर दौरों के बहाने वागड़ का सियासी रास्ता नाप रहे हैं सचिन पायलट!
इस लिंक को शेयर करें

