क्यों चुप हैं फायरब्रांड नेता? डीग में बच्चे को बेरहमी से पीटने के मामले में अब तक किसी का नहीं आया बयान, क्या अनहोनी का कर रहे इंतजार?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर हिंसक प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर इन दिनों सड़क से संसद तक हल्ला मचा हुआ है, राहुल गांधी गृह मंत्री अमित शाह पर फायरिंग के आदेश देने के आरोप लगा रहे हैं जिस पर देश भर के नेताओं समेत राजस्थान के नेता तक बयानबाजी कर रहे है लेकिन बीते दिनों डीग में जिस छात्र को स्कूल के कमरे में बंद करके बेरहमी से पीटा गया, वो बेहद नाजुक हालत में पहुंच गया है लेकिन अभी तक किसी भी नेता का बयान इस मामले में नहीं आया है। इससे बच्चे के परिजनों समेत आम जनता में आक्रोश भर गया है।
क्यों चुप हैं गहलोत डोटासरा और बेनीवाल, सत्ता पक्ष भी चुप
बच्चे को गंभीर रूप से पीटे जाने को लेकर एक तरफ जहां उसका परिवार दर-दर न्याय के लिए भटक रहा है। लेकिन हर छोटे-बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने वाले विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर चुप हैं जो कि जनता के समझ से परे है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल अभी तक इस मामले में चुप हैं।
विधायक ने भारत रफ्तार का फोन तक नहीं उठाया
दूसरी तरफ सत्ता पक्ष की तरफ से भी अभी तक इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया गया। यहां तक कि डीग-कुम्हेर से बीजेपी विधायक डॉ शैलेष सिंह तक बच्चे से मिलने नहीं पहुंचे। भारत रफ्तार ने जब उनसे संपर्क करने की कोशिश तो उन्होंने फोन तक नहीं उठाया। सरकार की इस कार्यशैली पर परिजनों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।
बस की सीट का कवर फटने पर पीटा था
ये मामला दो दिन पहले का है। बच्चे के परिजनों का कहना है कि डीग के बृजनगर क्षेत्र के डभावली गांव के गायत्री पब्लिक स्कूल के 11वीं क्लास के छात्र को बस की सीट का कवर फटने के विवाद में स्कूल डायरेक्टर ने कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा था। पीड़ित छात्र की पहचान प्रवीण कुमार पुत्र हरवीर सिंह के रूप में हुई है।
इस घटना ने स्कूल परिसरों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों के व्यवहार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए गए। परिजनों ने ये भी शिकायत की, कि घायल बच्चे छात्र को लेकर जब सरकारी अस्पताल (बृजनगर) पहुंचे, तो अस्पताल प्रशासन बच्चे को भर्ती करने से भी मना कर दिया था। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि बृजनगर थाने में शिकायत देने के बावजूद पुलिस FIR दर्ज करने से भी कतराती रही। पुलिस ने छात्र का नियमानुसार मेडिकल भी नहीं कराया, जिससे घटना के साक्ष्य प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है।
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