मोबाइल की दुनिया में सिमटती Gen Z की जिंदगी, सोशल मीडिया से बढ़ रही सामाजिक दूरी

Jaipur: आज की Gen Z यानी नई पीढ़ी को तकनीक के मामले में सबसे आगे माना जाता है। स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने में ये पीढ़ी बेहद दक्ष है। हालांकि, तकनीकी रूप से सक्षम होने के बावजूद सामाजिक मेलजोल और मानवीय संबंधों के मामले में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। जानकारों का मानना है कि सोशल मीडिया और बढ़ती डिजिटल निर्भरता इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
बच्चों में सामाजिक कौशल ही नहीं
पहले संयुक्त परिवारों का चलन ज्यादा था, जिससे बच्चों को परिवार और समाज के कई लोगों के साथ बातचीत करने के पर्याप्त अवसर मिलते थे। इससे उनमें सामाजिकता, संवाद कौशल और रिश्तों को समझने की क्षमता विकसित होती थी। लेकिन वर्तमान समय में छोटे परिवारों और सीमित सामाजिक संपर्क के कारण बच्चों और युवाओं में सामाजिक कौशल की कमी देखने को मिल रही है।
कोरोना-19 महामारी के दौरान ये हालात और ज्यादा साफ हुई। लॉकडाउन के महीनों में ज्यादातर बच्चे और युवा घरों में ही सीमित रहे। उनकी पढ़ाई, मनोरंजन और मित्रों से बातचीत का मुख्य जरिए मोबाइल और इंटरनेट बन गया। इस दौरान कई युवाओं का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया, जिसका असर उनके वास्तविक सामाजिक व्यवहार पर भी पड़ा।
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मोबाइल के जरिए ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिलने की लालसा
जानकारों का कहना है कि लगातार मोबाइल पर समय बिताने के कारण कई युवा आमने-सामने बातचीत करने से कतराने लगे हैं। उन्हें लगता है कि ज्यादातर जानकारी और अनुभव मोबाइल के जरिए से पाई जा सकते हैं, जबकि वास्तविक जीवन में संवाद और सामाजिक सहभागिता का कोई विकल्प नहीं है।
शिक्षकों और मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, केवल किताबों का ज्ञान किसी व्यक्ति को शिक्षित बना सकता है, लेकिन सामाजिक व्यवहार और व्यक्तित्व विकास के लिए लोगों के बीच रहना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए बच्चों को स्कूल, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक आयोजनों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
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