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किरोड़ी पर कीचड़ उछालने वाले डोटासरा ने कबूला अपना गुनाह, आखिर किन ‘बेइमानों’ को PCC चीफ ने दिए ‘अच्छे पद’

किरोड़ी पर कीचड़ उछालने वाले डोटासरा ने कबूला अपना गुनाह, आखिर किन ‘बेइमानों’ को PCC चीफ ने दिए ‘अच्छे पद’
राजस्थान
26 Jun 2026, 02:53 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Govind Singh Dotasra: कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा खुद ऐसा खुलासा किया है जिसने कांग्रेस के 'ईमानदारी के दावों' के परखच्चे उड़ा कर रख दिए हैं। डोटासरा पिछले कई दिनों से कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर जुगलकिशोर रिश्वत कांड को लेकर कीचड़ उछाल रहे थे, लेकिन उन्होंने जनता के सामने अपना एक गुनाह कबूल किया है जिसके चर्चे अब चारों तरफ होने लगे हैं। उन्होंने कैमरे के सामने वो सच कबूल कर लिया है जिसे सुनकर पूरी कांग्रेस बैकफुट पर आ गई है।

दरअसल बीते दिन गोविंद सिंह डोटासरा राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (RUCTA) के 46वें संवैधानिक प्रांतीय अधिवेशन में शामिल हुए थे। यहां उन्होंने बयान दिया था कि उनके कांग्रेस के कार्यकाल में उनसे बड़ी भारी भूल हुई कि उन्होंने कई बेईमान लोगों को उन्होंने अच्छे पद पर पहुंचाया। क्योंकि उन्हें इसके बारे में पता नहीं था कि वे लोग कैसे हैं। ये उनसे बड़ी भूल हुई थी जिसके लिए वो सभी से माफी मांगते हैं।

किरोड़ी के डर से कबूल लिया गुनाह?

डोटासरा के इसी कबूलनामे पर सोशल मीडिया पर बहस हो रही है कि डोटासरा को ये 'भूल' अचानक इस वक्त ही याद क्यों आई? क्या ये कबूलनामा किरोड़ी लाल मीणा के उस खौफ का नतीजा है, जो भ्रष्टाचारियों की नींद उड़ाए रखता है? क्या डोटासरा को ये डर सता रहा था कि अगर उन्होंने खुद अपनी 'गलती' नहीं मानी, तो कृषि मंत्री खुद कही उनके इस 'काले खेल' का चिट्ठा सामने ले आएं।

किरोड़ी पर भ्रष्टाचार का लगाया है आरोप

दरअसल डोटासरा का आरोप था कि किरोड़ी के नाक के नीचे जुगलकिशोर ने रिश्वतखोरी की। लेकिन किरोड़ी का कहना है की उन्हें अपने साथ काम करने वाले इस शख्स पर जरा सी भी भनक लगी, उन्होंने किसी का लिहाज नहीं किया। उन्होंने तुरंत जाल बिछाया और खुद आगे बढ़कर उस भ्रष्टाचारी को रंगे हाथों पकड़वा दिया।

अब इस पर कई सवाल उठते हैं कि जिसे डोटासरा 'भूल' कह रहे हैं, क्या वो राजस्थान के लाखों बेरोजगारों और जनता के हक पर डाका डालने वाले चहेतों को मलाईदार पदों पर बैठाने की 'साजिश' थी?

और जब किरोड़ी ने अपने विभाग के भ्रष्टाचारी को खुद पकड़वाया, तो डोटासरा ने अपने कार्यकाल के भ्रष्टाचारियों को संरक्षण क्यों दिया? ऐसे में अब ये मुद्दा किस तरफ करवट बदलता है ये देखने वाली बात होगी।

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