पहले कोटा फिर बीकानेर और अब भीलवाड़ा...6 दिन में 5 प्रसूताओं की मौत, संक्रमित उपकरण से ही करते रहे सिजेरियन, भड़के गहलोत-बेनीवाल

राजस्थान के अस्पतालों में प्रसूताओं की मौतों का मामला थम नहीं रहा है। पहले कोटा और बीकानेर के सरकारी अस्पतालों में कुल 11 प्रसूताओं की मौत हुई तो अब भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में पिछले 6 दिनों में 5 प्रसूताओं की मौत की खबर ने राजस्थान को हिला डाला। गौर करने वाली बात ये है कि इन सभी घटनाओं का एक ही पैटर्न रहा है और वो ये कि संक्रमित ओटी और संक्रमित उपकरणों से ये सिजेरियन ऑपरेशन हुए हैं। भीलवाड़ा में भी यही कारण फिलहाल सामने आया है। इस पर अब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
"राजस्थान को भगवान भरोसे छोड़ा रखा ही बीजेपी ने?"
भीलवाड़ा में प्रसूताओं की मौत पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि ऑपरेशन थिएटर (OT) में संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव होने के बावजूद लगातार सीजेरियन करते रहना और 30-40 ऑपरेशनों के बीच महज 5 सर्जिकल सेट होना सीधे तौर पर घोर लापरवाही और बदहाल चिकित्सा व्यवस्था को दर्शाता है। कोटा और बीकानेर, जोधपुर के बाद अब भीलवाड़ा की यह स्थिति विचलित करने वाली है।
गहलोत ने कह कि क्या राजस्थान को भाजपा सरकार ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है? एक के बाद एक ऐसी घटनाएं जैसे सामने आ रही हैं वह दिखाता है कि सरकार का इस सबसे कोई मतलब नहीं है। राजस्थान के अलग-अलग अस्पतालों में बनी ऐसी स्थिति के सही मूल्यांकन एवं निदान के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को एक्सपर्ट की टीम भेजकर जांच करवानी चाहिए जिससे प्रसूताओं की जान बचाई जा सके।
“इन माताओं की मौत का जिम्मेदार कौन?”
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान की बदहाल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार माताओं की जान ले रही है। पहले कोटा, फिर बीकानेर और अब भीलवाड़ा के सरकारी अस्पताल में 6 दिनों में 5 प्रसूताओं की मौत की खबर बेहद भयावह और शर्मनाक है। अगर ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की आशंका थी, उपकरणों की कमी थी और फिर भी लगातार सीजेरियन किए जाते रहे, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्था की घोर विफलता है। आखिर इन माताओं की मौत का जिम्मेदार कौन है?
“स्वास्थ्य मंत्री सिर्फ बयानबाजी तक ही सीमित”
हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल से सवाल पूछते हुए कहा कि आखिर कब तक सरकारी अस्पतालों में माताओं की जान के साथ ऐसा खिलवाड़ होता रहेगा? क्या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ बयान देने तक सीमित रह गई है? राजस्थान के गैर जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री की नाकामी के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था ICU में है और सरकार संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पर खड़ी है। माताओं की मौत पर जवाबदेही तय होना ही चाहिए।
सिजेरियन के बाद बिगड़ी प्रसूताओं की हालत
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में जिन 5 प्रसूताओं की मौत 6 दिन में हुई है उन सभी की सीजेरियन डिलीवरी हुई थी। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल ICU भेजा और यहां पर उनकी जान चली गई। पहले तो अस्पताल प्रशासन ने कहा था कि मौतों की वजह पल्मोनरी एम्बोलिज्म, एस्पिरेशन, गंभीर एनीमिया, सीजर, PIH, एक्लेम्पसिया और दूसरी बीमारियों से हुईं। लेकिन जब OT की संक्रमण जांच रिपोर्ट यानी क्लचर टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई तब जाकर लापरवाही की सारी कलई खुली।
जिन महिलाओं की मौत हुई है उनमें पोटला निवासी संगीता जीनगर (32), शिमला गुर्जर (28), फोरी देवी, इशा पांडे, दिव्या शामिल हैं। इन सभी की मौत के मामले में इनके परिजनों ने लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
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