बीच भाषण में माइक फेंका, स्टेज छोड़ा...आखिर हनुमान बेनीवाल के गुस्से की क्या थी असली वजह, आयोजनकर्ता भी निराश

Hanuman Beniwal: चूरू के ताल छापर में RLP के कार्यालय का उद्घाटन समारोह में उस वक्त बवाल मच गया जब नागौर सांसद और RLP संयोजक हनुमान बेनीवाल भड़कते हुए कार्यक्रम छोड़कर चले गए। सोशल मीडिया पर रविवार रात से उनका ये वीडियो ताबड़तोड़ वायरल हो रहा है। जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे उन्होंने बीच भाषण में ही गुस्से में माइक फेंका और मंच छोड़कर चले गए। यहां पर वीर तेजाजी महाराज के भजन-कीर्तन का कार्यक्रम भी था। बेनीवाल के इस रुख से उनके कार्यकर्ता तो परेशान हैं ही साथ ही आयोजनकर्ताओं में भी भारी निराशा है। क्योंकि उन्होंने काफी भारी-भरकम खर्चा इस कार्यक्रम के लिए किया था।
भाषण के बीच मंच के आगे बैठे समर्थक मचा रहे थे हल्ला
दरअसल हनुमान बेनीवाल मंच पर भाषण देने आए, तो आगे बैठे कुछ उत्साही समर्थक हल्ला मचा रहे थे और हुड़दंगी दिखा रहे थे। आयोजकों के बार-बार मना करने के बावजूद जब वे शांत नहीं हुए तो हनुमान बेनीवाल का पारा हाई हो गया और उन्होंने कह दिया कि ऐसे कार्यक्रम में उन्हें मत बुलाया करो, इतना शोर कर रहे हो क्या यहां से कभी एक भी विधायक दिया है तुमने। जहां उत्साह दिखाना होता है वहां तो नहीं दिखाते। बेनीवाल ने कह दिया कि मुझे ही यहां नहीं आना चाहिए था। फिर इसके बाद वे माइक पटककर चलते बने।
समर्थकों का अति उत्साह बेनीवाल के लिए खड़ी कर रहा परेशानी
अब इस पूरे वाकये को देखकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं और कहीं ना कहीं हनुमान बेनीवाल का गुस्सा भी अपनी जगह जायज़ लगता है। हकीकत तो ये है कि कई बार RLP के ये तथाकथित समर्थक जोश-जोश में ऐसी हुल्लड़बाजी कर जाते हैं, जिससे खुद बेनीवाल असहज हो जाते हैं। वो कई बार खुद मंच पर ये बात कह भी चुके हैं। ये बात सिर्फ आम जनता नहीं, बल्कि उनकी रैलियों को कवर करने वाले रिपोर्टर्स ने भी कई बार महसूस की है। राजनीति के गलियारों में तो यहां तक कहा जाता है कि हनुमान बेनीवाल के विरोधी चाहें जो कर लें, लेकिन उनकी असली मुश्किलें अक्सर उनके अपने ही समर्थक बढ़ा देते हैं।
मंच छोड़ना बड़े नेता के लिए ठीक नहीं
वीडियो वायरल होने के बाद बाजार में चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ लोगों का कहना है कि ये सब विरोधियों का किया-कराया था जो प्रोग्राम डिस्टर्ब करने आए थे। कुछ का मानना है कि गुस्सा आना लाजिमी है, क्योंकि अनुशासनहीनता किसी को पसंद नहीं आती, लेकिन इस तरह गुस्से में बीच मंच से उठकर चले जाना एक बड़े नेता के तौर पर सही नहीं है।
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