RPSC समेत 9 आयोग के मुखिया की नियुक्तियों की राह ताक रही जनता, बेनीवाल ने बीजेपी सरकार पर लगाया लापरवाही का आरोप

Hanuman Beniwal: राजस्थान में धीरे-धीरे अब प्रतिष्ठित आयोग के चेयरपर्सन जा रहे हैं लेकिन कोई नियुक्ति सरकार नहीं कर रही है। जो सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। क्योंकि इन प्रमुख आयोगों में RPSC यानी राजस्थान लोक सेवा आयोग, सूचना आयोग, महिला आयोग, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग,राज्य मानवाधिकार आयोग, राज्य अल्पसंख्यक आयोग, राज्य वित्त आयोग, अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग, निशक्तजन आयोग शामिल हैं। इतना ही नहीं भ्रष्टाचार और आमजन से जुड़े मुद्दों पर लोकायुक्त की तैनाती भी अब तक नहीं हुई है।
‘सरकार के दावे केवल काजगों में ही’
इस मुद्दे पर हनुमान बेनीवाल ने सरकार पर कड़ा निशाना साधा है। उन्होंने इसे सरकार की गंभीर लापरवाही बताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ये हालात बताते हैं कि राजस्थान की भाजपा सरकार के किए जा रहे सुशासन के दावे पूरी तरह खोखले हैं और जनता को बेहतर प्रशासन और जवाबदेही देने के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं।
RLP ने PM Modi से ही पूछ लिए सवाल
RLP ने इस मामले में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए ये जो राजस्थान में हो रहा है कि आपको इस बात की जानकारी है। पार्टी ने कहा कि राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक और वैधानिक संस्थाओं में शीर्ष पद खाली पड़े है?
अब राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) भी अध्यक्ष विहीन होने जा रहा है, जबकि लोकायुक्त, सूचना आयोग, महिला आयोग, बाल अधिकार आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग सहित कई संस्थाएं पहले से ही पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही है।
ये केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि राजस्थान की भाजपा सरकार की जवाबदेही पर गंभीर सवालिया निशान भी खड़े कर रहे हैं। जिन संस्थाओं पर युवाओं के भविष्य, भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता, भ्रष्टाचार की निगरानी, महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा और आमजन की शिकायतों के निस्तारण की जिम्मेदारी है, उन्हें नेतृत्वविहीन छोड़ना आखिर किसकी विफलता है?
हाईकोर्ट की चिंता के बाद भी सरकार टस से मस नहीं
पार्टी ने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट भी समय-समय पर इन रिक्तियों को लेकर चिंता जता चुका है, फिर भी राजस्थान सरकार जरूरी नियुक्तियां करने में असफल क्यों रही? क्या आपकी भाजपा सरकार को संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती की कोई चिंता नहीं है? क्या प्रदेश के युवाओं, महिलाओं, किसानों और आम नागरिकों के अधिकार भजनलाल सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं ?
RLP ने भजनलाल सरकार से पूछ डाले ये सवाल
RLP ने सवाल उठाया कि राजस्थान की जनता देश के प्रधानमंत्री मोदी से ये सवाल कर रही है कि जब भर्ती परीक्षाओं, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले इन संस्थाओं से प्रभावित होते हैं, तब सरकार की यह निष्क्रियता किसके हित में है?
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से राजस्थान की जनता ये जानना चाहती है कि -
1-संवैधानिक संस्थाओं में रिक्त पदों को भरने की समयबद्ध योजना क्या है?
2- नियुक्तियों में लगातार हो रही देरी के लिए जिम्मेदार कौन है?
3- क्या सरकार ऐसी संस्थाओं को कमजोर कर जवाबदेही से बचना चाहती है?
4- युवाओं और आमजन के हितों से जुड़े मामलों को लंबित रखने का जवाब कौन देगा?
लोकतंत्र में किसी भी दल की सरकार की पहचान घोषणाओं से नहीं, बल्कि संस्थाओं को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता से होती है। अगर संवैधानिक संस्थाएं ही खाली पड़ी रहें तो सुशासन के दावे खोखले साबित होते हैं।
हनुमान बेनीवाल और RLP के इस लंबे-चौड़े पोस्ट के बाद अब ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि हनुमान बेनीवाल अब इस मुद्दे को लेकर सड़क पर आंदोलन खड़ा कर सकती है? क्योंकि जिस तरह से RLP हर छोटे मुद्दों पर अपनी सक्रियता दिखा रही है उस हिसाब से ऐसा लगता है कि जल्द ही बेनीवाल इस मामले में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकते है।
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