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प्रमोद शर्मा के बहाने फिर राजस्थान सरकार पर बेनीवाल ने खड़े किए सवाल, पूछा- क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?

प्रमोद शर्मा के बहाने फिर राजस्थान सरकार पर बेनीवाल ने खड़े किए सवाल, पूछा- क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?
राजस्थान
05 Jun 2026, 01:21 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

Hanuman Beniwal: राजस्थान की राजनीति में इस वक्त एक और नया बवंडर खड़ा हो गया है। एक तरफ सूबे के मुखिया भजनलाल शर्मा हैं, तो दूसरी तरफ हैं RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल। मामला इतना गरमा चुका है कि बेनीवाल की सुरक्षा में तैनात PSO तक हटा दिए गए हैं, इस पर बेनीवाल लगातार राजस्थान सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने अब सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajan Lal Sharma) को कटघरे में खड़ा करते हुए एक ऐसा तीखा हमला बोला है, जिसने जयपुर से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।

खुद को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताता है प्रमोद शर्मा

हनुमान बेनीवाल का सीधा आरोप है कि प्रमोद शर्मा खुद को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताता है। उस पर जमीन हड़पना, फर्जी कागजात तैयार करना और बड़ी धोखाधड़ी के मामले दर्ज है। मामला हाई कोर्ट तक भी पहुंचा, जहां से प्रमोद शर्मा को कोई राहत नहीं मिली। अब हनुमान बेनीवाल इसी बात को लेकर फ्रंट फुट पर खेल रहे हैं। उनका कहना है कि अगर कोई आम आदमी होता, तो राजस्थान पुलिस अब तक उसे पाताल से भी ढूंढ निकालती। लेकिन चूंकि मामला 'खास रिश्तेदार का है, इसलिए कानून की रफ्तार कछुए जैसी हो गई है।

प्रमोद शर्मा को गिरफ्तार क्यों नहीं कर रहे- बेनीवाल

बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई तीखे तीर छोड़े हैं, पहला सवाल दागा कि जब हाई कोर्ट ने भी प्रमोद शर्मा को राहत नहीं दी, तो पुलिस उसे गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही? क्या वो पुलिस की पहुंच से बाहर है? और अगर वो सच में फरार है, तो क्या सरकार उसके सिर पर इनाम घोषित करने की हिम्मत दिखाएगी? बेनीवाल ने कहा कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को शांति से ज्ञापन देने गए RLP कार्यकर्ताओं पर तो झूठे केस करके तुरंत इनाम घोषित कर दिया गया, लेकिन प्रमोद शर्मा के लिए ये 'VIP ट्रीटमेंट' क्यों? क्या भू-माफियाओं को सरकार ने कोई स्पेशल VIP पास दे रखा है?

अब यहां समझने वाली बात ये है कि ये सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि राजस्थान में 'जीरो टॉलरेंस' के दावों की परीक्षा है। बेनीवाल सीधे तौर पर जनता के बीच ये संदेश देना चाहते हैं कि सरकार की कथनी और करनी में फर्क है। वो पूछ रहे हैं कि क्या रिश्तेदारी कानून से भी बड़ी हो गई है? भले ही सरकार ने बेनीवाल की सुरक्षा कम कर दी हो, लेकिन उनके तेवरों से साफ है कि वो इस मुद्दे को आसानी से ठंडे बस्ते में नहीं जाने देंगे।

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