राजस्थान में बेहद मजबूत अशोक गहलोत की पकड़, नीरज डांगी की राज्यसभा उम्मीदवारी ने एक बार किया साबित!

Rajasthan Rajya Sabha Elections: राजस्थान की तरफ से राज्यसभा चुनाव को लेकर गहमागहमी शुरू हो गई है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने बीते दिन अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। बीजेपी ने सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं कांग्रेस ने नीरज डांगी को मैदान में उतारा है। नीरज डांगी को दोबारा उतारने के कई मायने निकलकर सामने आए हैं। एक तो ये कि वो कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा से भी ज्यादा मजबूत दिख रहे हैं दूसरा ये कि वो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खासमखास माने जाते हैं।
पवन खेड़ा का साइड करके पाई उम्मीदवारी
कांग्रेस के राज्यसभा प्रत्याशी नीरज डांगी की राह में सबसे बड़ी बाधा मीडिया चेयरपर्सन पवन खेड़ा थे। कहा जा रहा था कि खेड़ा को राजस्थान से प्रत्याशी बनाया जाएगा। लेकिन खेड़ा को आलाकमान ने कर्नाटक के लिए तैयार कर दिया तो राजस्थान में डांगी के लिए जगह खाली हो गई। नीरज डांगी वर्तमान में राजस्थान से ही राज्यसभा सांसद हैं। वहीं माइनॉरिटी चेहरे पर भी कांग्रेस में विचार-विमर्श हुआ था। कांग्रेस को ऐसा नेता चाहिए था जो दिल्ली में भी पार्टी को मजबूत कर सके।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत खेमे के नेता हैं डांगी
नीरज डांगी को दोबारा राज्यसभा चुनाव के लिए उतारना पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का तगड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। क्योंकि नीरज डांगी अशोक गहलोत की ही खेमे के नेता माने जाते हैं। पिछली बार भी राज्यसभा चुनाव के लिए डांगी की उम्मीदवारी को लिए पैरवी गहलोत ने ही की थी। अब राज्यसभा की सीट को जीतने के लिए 51 विधायकों के वोट चाहिए। जो कि कांग्रेस विधायकों की संख्या 67 के हिसाब से तय माना जा रहा है कि उनकी जीत पक्की है।
बता दें कि नीरज डांगी ने 12वीं और 13वीं विधानसभा में चुनाव लड़ा। लेकिन दोनों बार हार गए थे। वे राज्य और केंद्रीय स्तर पर कई बड़े पदों पर रहे। डांगी 2011 से 2014 तक राजस्थान कांग्रेस के महासचिव रहे। डांगी जून 2020 को कांग्रेस टिकट पर राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। कांग्रेस प्रत्याशी शुक्रवार या सोमवार को नामांकन कर सकते हैं।
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