IAS टीना डाबी के पति प्रदीप गवांडे ने कर दिया ऐसा काम, देश भर में हो रही तारीफ

देश की सबसे चर्चित और लोकप्रिय IAS अधिकारियों में से एक टीना डाबी अक्सर अपनी बेहतरीन कार्यशैली, ईमानदारी और जनता के प्रति संवेदनशीलता के लिए चर्चा में रहती हैं। लोग उनके काम की तारीफ करते नहीं थकते। लेकिन अब टीना डाबी पति और जालोर के जिला कलेक्टर IAS डॉ. प्रदीप के. गवांडे भी अपने एक ऐसे ही नेक काम की वजह से पूरे राजस्थान और सोशल मीडिया पर छा गए हैं। उन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसकी हर तरफ जमकर सराहना हो रही है।
अपनी कुर्सी छोड़कर बूढ़ी महिला के पास जा बैठे
दरअसल 1 जुलाई को जालोर कलेक्ट्रेट परिसर में आम दिनों की तरह ही कामकाज चल रहा था। तभी वहां एक 80 साल की बुजुर्ग महिला अपनी फरियाद लेकर पहुंचीं। जैसे ही कलेक्टर डॉ. प्रदीप के. गवांडे को पता चला कि उनके चैंबर के बाहर एक बेहद बुजुर्ग और चलने-फिरने में असमर्थ महिला खड़ी हैं, तो उन्होंने IAS पद का रौब या प्रोटोकॉल नहीं दिखाया। वे तुरंत अपनी कुर्सी से उठे और अपने चैंबर से बाहर आकर कलेक्ट्रेट की गैलरी में ही बुजुर्ग महिला के पास बैठ गए। उन्होंने बेहद प्यार और अपनेपन से उनकी पूरी बात सुनी।
क्या थी कहानी?
ये दर्दभरी कहानी थी आहोर तहसील के जेतपुरा गांव की रहने वाली 80 वर्षीय बुजुर्ग कोकु देवी की। उनकी विधवा बेटी नाथुदेवी ने बताया कि कोकु देवी को पहले सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलती थी। लेकिन करीब 5 साल पहले जब उम्र बढ़ने की वजह से उनके हाथों की रेखाएं मिट गईं, तो बायोमेट्रिक मशीन पर उनके फिंगरप्रिंट मैच होना बंद हो गए। बस, इसी तकनीकी खराबी के चलते पिछले 5 साल से इस बुजुर्ग मां की पेंशन बंद थी। परिवार ने इसके लिए सरकारी दफ्तरों के खूब चक्कर काटे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई थी।
बुधवार को जब ये बुजुर्ग महिला कलेक्ट्रेट पहुंचीं, तो वहां तैनात सुरक्षाकर्मी चैनाराम ने संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने बुजुर्ग महिला को सहारा देकर व्हीलचेयर पर बैठाया और कलेक्टर चैंबर तक पहुंचाया। कलेक्टर डॉ. प्रदीप के. गवांडे ने जब गैलरी में ही बैठकर इस बुजुर्ग मां का दर्द सुना, तो वे भावुक हो गए। उन्होंने बिना एक पल गंवाए मौके पर ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों को तलब किया और हाथों-हाथ इस समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए।
“किसी बुजुर्ग को ना होना पड़े परेशान”
मामले का निपटारा करने के बाद कलेक्टर साहब ने जिले के सभी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि सरकारी दफ्तरों में बुजुर्गों के मामलों को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाए, ताकि किसी भी बुजुर्ग को परेशान न होना पड़े। वाकई, जहां एक तरफ लोग टीना डाबी के काम के कायल रहते हैं, वहीं अब उनके पति डॉ. प्रदीप गवांडे के इस मानवीय और संवेदनशील रूप ने जालोर की जनता का दिल जीत लिया है। प्रशासन का ऐसा चेहरा सच में तारीफ के काबिल है।
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