जाति से ऊपर प्यार? सरकार दे रही इनाम! इंटरकास्ट मैरिज पर मिल रहे 10 लाख रुपए

Inter Caste Marriage Scheme: एक वक्ता था जब भारत में बाहर की जाति के लड़के-लड़की का शादी करना जान जोखिम में डालने जैसा कदम माना जाता था। कई मामलों में तो परिवार ही अपने बच्चों के खिलाफ खड़े हो जाते थे। समाज का दबाव इतना ज्यादा था कि ऑनर किलिंग जैसी दर्दनाक घटनाएं भी समाज को शर्मसार करती थीं।
अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। ऐसे लोगों को केंद्र सरकार मदद दे रही है। जो लोग इंटरकास्ट मैरिज करना चाहते हैं उन्हें ढाई लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दे रही है। राजस्थान सरकार तो इस राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक दे रही है।
केंद्र सरकार की ये योजना दे रही लाखों रुपए
केंद्र सरकार डॉ. अंबेडकर सामाजिक समरसता अंतरजातीय विवाह योजना चलाती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि समाज में जातीय भेदभाव कम करना है और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत अगर पति या पत्नी में से एक अनुसूचित जाति यानी SC वर्ग से है और दूसरा गैर-एससी वर्ग से है, तो इन्हें कुल ढाई लाख रुपये की वित्तीय मदद दी जाती है।
कैसे दी जाती है मदद?
इसमें डेढ़ 1.5 लाख रुपये सीधे पति-पत्नी के ज्वाइंट अकाउंट में भेजे जाते हैं। 1 लाख रुपये 3 साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में रखे जाते हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें हैं जैसे कि दोनों की ये पहली शादी होनी चाहिए और ये शादी हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत कानूनन रजिस्टर्ड होनी चाहिए। इस योजना का लाभ लेने के लिए शादी के एक साल के भीतर आवेदन करना जरूरी है। आवेदन डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन या संबंधित राज्य के सामाजिक न्याय विभाग के जरिए से किया जा सकता है।
अब तक 26 हजार से ज्यादा लोग उठा चुके हैं योजना का फायदा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में देशभर में छब्बीस हजार पचास (26,050) से ज्यादा लोगों को इस योजना का लाभ मिला है। ये आंकड़ें बताते हैं कि इंटरकास्ट मैरिज को लेकर समाज में धीरे-धीरे स्वीकार्यता बढ़ रही है।
राजस्थान में 10 लाख रुपए दे रही सरकार
अगर बात राजस्थान की करें तो यहां डॉ. सविता बेन अंबेडकर अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना लागू है। इस योजना के तहत एलिजिबल कपल को कुल 10 लाख रुपये तक की मदद दी जाती है। इसमें 5 लाख रुपये सीधे ज्वाइंट अकाउंट में दिए जाते हैं और बाकी के 5 लाख रुपये 8 साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा किए जाते हैं। इसके नियम भी केंद्रीय योजना के नियम के अनुरूप ही हैं।
हालांकि भारत में इंटरकास्ट मैरिज को लेकर सोच पूरी तरह नहीं बदली है, लेकिन बदलाव की दिशा जरूर दिखाई दे रही है।
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