सरकार या बेनीवाल! भैराणा धाम को न्याय दिलाने में किसका हाथ, JDA ने निरस्त किया रीको का भूमि आवंटन

जयपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर दूदू के बिचनू के भैराणा धाम में यहां संत दादू दयाल जी की तपोस्थली का हरित क्षेत्र और उसकी आध्यात्मिक शांति अब सुरक्षित रहेगी। जेडीए ने 800 बीघा ग्रीन बेल्ट एरिया में RIICO के लिए आवंटित जमीन को निरस्त कर दिया है। जिससे अब भैराणा धाम और रीको का विवाद आखिरकार खत्म होता दिख रहा है। जयपुर विकास प्राधिकरण ने 206.98 हेक्टेयर के एरिया में रीको को आवंटित 21 खसरों की जमीन को आधिकारिक तौर पर निरस्त कर दिया है। जेडीए की भूमि और संपत्ति निस्तारण समिति ने अपनी मीटिंग में ग्रीन बेल्ट की सुरक्षा और साधु-संतों के भारी विरोध को इस फैसले का मुख्य आधार बताया है।
संत दादूदयाल जी की 500 साल पुरानी तपोस्थली
इस पूरे फैसले के पीछे जो सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश निकलकर सामने आ रहा है, वो है कि क्या ये हनुमान बेनीवाल और उनकी पार्टी RLP की एक और बड़ी जीत है? दरअसल भैराणा गांव स्थित ये स्थल संत दादू दयाल जी की 500 साल पुरानी तपोस्थली और मोक्ष स्थली है। जब यहां इंडस्ट्रियल एरिया के लिए जमीन आवंटित हुई, तो दादू पंथ के साधु-संतों और स्थानीय नागरिकों ने आस्था पर आघात बताते हुए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया था।
हनुमान बेनीवाल ने संत महापंचायत में फूंका था सरकार के खिलाफ बिगुल
इस जन-आंदोलन को असली राजनीतिक धार और आक्रामकता तब मिली जब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने संतों के समर्थन में हुंकार भरी। बेनीवाल ने सरकार को साफ चेतावनी दी थी और दूदू में संतों की महापंचायत में शामिल होकर इसके खिलाफ आवाज बुलंद की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बेनीवाल के जमीन पर उतरने और उनके आक्रामक रुख के कारण ही सरकार पर भारी दबाव बना और प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा। अब इस पूरे क्षेत्र में कोई भी औद्योगिक गतिविधि या इंडस्ट्रियल एरिया विकसित नहीं किया जा सकेगा।
आरएलपी समर्थकों और स्थानीय लोगों के बीच इस फैसले को हनुमान बेनीवाल के संघर्ष की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं तमाम राजनीतिक दावों के बीच, सबसे बड़ी राहत भैराणा धाम को आखिर मिल ही गई है। अब यहां संत दादू दयाल जी की तपोस्थली का हरित क्षेत्र और उसकी आध्यात्मिक शांति अब सुरक्षित रहेगी।
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