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20 अगस्त से शुरु राजस्थान विधानसभा सत्र, UCC बिल पर मचेगा हंगामा, जानें अगर कानून बना तो क्या होगा?

20 अगस्त से शुरु राजस्थान विधानसभा सत्र, UCC बिल पर मचेगा हंगामा, जानें अगर कानून बना तो क्या होगा?
राजस्थान
31 Jul 2026, 10:49 am
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 20 अगस्त से शुरु होगा। यानी लगभग 20 दिन बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर जोरदार बहस देखने को मिलेगी। फिर चाहे राहुल गांधी और अमित शाह का मुद्दा हो, छात्र प्रदर्शन का मुद्दा हो, राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव कराने का मामला हो। और तो और इसी सत्र में सरकार UCC यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड का बिल पेश करेगी। ऐसे में ये तो तय है कि ये सत्र हंगामेदार रहने वाला है। क्योंकि कांग्रेस इस बिल के विरोध में है। सत्ता पक्ष अब कैसे इस बिल को सदन में पारित कराता है ये देखने वाली बात होगी।

संसद की तरह विधानसभा में भी हो सकता हंगामा

देश की संसद में छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस की चलाई गई पैलेट गन और कथित तौर पर AK-47 को लेकर गरमागरम बहस चल रही है। राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर छात्र प्रदर्शनकारियों पर गन चलाने का आदेश देने का आरोप लगाया है। जिस पर विपक्ष संसद में लगातार गतिरोध पैदा कर रहा है। इस पर अशोक गहलोत, डोटासरा, जूली समेत राजस्थान के नेताओं ने भी बयानबाजी की है। ऐसे में इसकी संभावना जताई जा रही है कि विधानसभा का ये मानसून सत्र हंगामेदार रह सकता है।

क्या है UCC?

UCC यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड देश के सभी नागरिकों को समान कानून के दायरे में लाना। सभी नागरिकों को देश में एक जैसे कानून का पालन करना होगा चाहे वो किसी भी धर्म के हों। जैसे शादी, तलाक, बच्चे गोद लेना, संपत्ति का बंटवारा समेत कई मामलों में एक ही कानून का पालन करना होगा। क्योंकि वर्तमान में देश में अलग-अलग धर्म के नागरिक अपने पर्सनल लॉ का पालन करते हैं। बता दें कि ये कानून सिर्फ उनके निजी और पारिवारिक मामलों में ही लागू होते हैं, चोरी-अपराध जैसे मामलों में नहीं।

भारत में मुस्लिम, ईसाई, पारसी और यहूदी धर्म के लोग अपने निजी मामलों में अपने पर्सनल लॉ का ही पालन करते हैं।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर कांग्रेस का कहना है कि वो संविधान के अनुच्छेद 44 (UCC) का सम्मान करती है, लेकिन भाजपा सरकार इसे लागू करने के तरीके और राजनीतिक मंशा का पुरजोर विरोध करती है। कांग्रेस ने संसद और मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में इसके खिलाफ चर्चा भी की थी। कांग्रेस का कहना है कि UCC को बिना सभी पक्षों, धार्मिक नेताओं से चर्चा किए बिना थोपा जा रहा है। उसका कहना है कि सरकार को पहले इसका एक स्पष्ट राष्ट्रीय मसौदा सार्वजनिक करना चाहिए और उस पर खुली बहस करानी चाहिए।

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