8 लोगों की मौत के बाद जागा शासन-प्रशासन, अवैध पटाखा फैक्ट्रियों में अब पड़ रहे छापे, मकान-फैक्ट्री मालिक याकूब और फिरोज फरार

जयपुर। खो नागोरियान इलाके में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और आगजनी की घटना के बाद राजस्थान प्रशासन हरकत में आ गया है। इस हादसे में 8 लोगों की मौत और कई लोगों के गंभीर घायल होने के बाद अब जयपुर समेत प्रदेशभर में अवैध पटाखा निर्माण यूनिट पर छापेमारी कर अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार सुबह खो नागोरियान के एक ASI समेत 2 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी कर दिया गया। लेकिन इस हादसे के बाद से मकान मालिक याकूब और फैक्ट्री का मालिक फिरोज फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। बता दें कि ये अवैध पटाखा फैक्ट्री एक मकान में संचालित हो रही थी। जो आयशा नगर के तलाई इलाके के करीम नगर-बी में स्थित है।
3 फैक्ट्रियों में पकड़ा गया बारूद का भंडार
प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, अग्निशमन विभाग और विस्फोटक विभाग की संयुक्त टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं। जयपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में उन गोदामों, फैक्ट्रियों और मकानों की जांच की जा रही है जहां बिना लाइसेंस पटाखों का निर्माण या भंडारण किए जाने की आशंका है। अभी तक 3 फैक्ट्रियां पकड़ी गई हैं जहां पर बड़ी मात्रा में बारूद का भंडारण किया गया था।
हादसे ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल
खो नागोरियान में जिस स्थान पर विस्फोट हुआ, वहां कथित तौर पर अवैध रूप से पटाखों का निर्माण और भंडारण किया जा रहा था। धमाका इतना तेज था कि आसपास के मकानों तक इसकी गूंज सुनाई दी और देखते ही देखते आग ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में एक बच्चे समेत अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। 4 लोगों ने तो मौके पर ही दम तोड़ दिया था। 5 लोगों को गंभीर हालत में जयपुर में SMS अस्पताल लाया गया था लेकिन इनमें भी 4 लोगों की मौत हो गई है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाया है।
अब पूरे प्रदेश में खंगाले जा रहे रिकॉर्ड
सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासनों को अपने-अपने क्षेत्रों में लाइसेंसधारी और गैर-लाइसेंसधारी पटाखा इकाइयों का वेरिफिकेशन करने के निर्देश दिए हैं। गोदामों की क्षमता, सुरक्षा उपकरण, अग्निशमन इंतजाम और विस्फोटक नियमों के पालन की जांच की जा रही है।
जयपुर में कई स्थानों पर टीमों ने गोदामों पर छापे मारे हैं। संदिग्ध गतिविधियों वाली जगहों की लिस्ट बनाई है। जिन फैक्ट्रियों के पास वैध दस्तावेज नहीं मिले, उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पहले भी हादसों के बाद चला था अभियान
राजस्थान में ये पहली बार नहीं है जब किसी बड़े विस्फोट के बाद प्रशासन को इस तरह का छापेमारी अभियान चलाना पड़ रहा हो। इसी साल खैरथल-तिजारा जिले में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के बाद 2,500 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों की जांच की गई थी और 1,000 से ज्यादा इकाइयों को नोटिस जारी किए गए थे। इस हादसे में भी 8 गरीब मजदूरों की मौत हो गई थी।
सबसे बड़ा सवाल, अवैध फैक्ट्रियां चल कैसे रही हैं?
खो नागोरियान हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अवैध पटाखा फैक्ट्रियां आखिर प्रशासन की नजरों से कैसे बच जाती हैं। क्योंकि पटाखा निर्माण और भंडारण में बहुत ज्यादा ज्वलनशील केमिकल्स का इस्तेमाल होता है, इसलिए छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
खो नागोरियान की त्रासदी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सुरक्षा नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं या फिर इस बार कार्रवाई जमीनी स्तर तक पहुंचेगी।
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