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पान की पीक, गंदे टॉयलेट, टूटे दरवाजे, जयपुर निगम कार्यालय के शौचालय के ये हालत

पान की पीक, गंदे टॉयलेट, टूटे दरवाजे, जयपुर निगम कार्यालय के शौचालय के ये हालत
राजस्थान
09 Aug 2026, 05:02 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Jaipur: पान की पीक से रंगी हुई दीवारें...गंदे टॉयलेट... जिनका फर्श तक साफ नहीं...शौचालय के टूटे हुए दरवाजे...आपको लग रहा होगा कि ये किसी रेलवे स्टेशन या बस स्टेशन के या किसी पब्लिक टॉय़लेट का नजारा है लेकिन नहीं, ये उस सरकारी संस्था की कारीगरी के निशान हैं जो पूरे शहर और वहां के शौचालयों की साफ-सफाई का जिम्मा अपने कंधे पर उठाती है। जी हां, य़े हैं जयपुर नगर निगम। जिसके खुद के ऑफिस में शौचालयों की इतनी बदतर हालत है वो क्या शहर के पब्लिक टॉयलेट की जिम्मेदारी उठाएगा। इसकी पड़ताल भारत रफ्तार की हमारी टीम ने खुद ग्राउंड पर उतरकर की।

हमारी टीम ने यहां देखा कि नगर निगम के प्रसाधन एरिया की एंट्री होती है पान की पीक से जो आपको कंफ्यूज कर देंगे कि आप निगम कार्यालय में ही हैं कि फुटपाथ पर बने किसी सार्वजनिक शौचालय में। यहां हमें एक टॉयलेट दिखा जो इंडियन स्टाइल वाला है। उसमें तो नगर निगम के आर्किटेक्चर की अद्भुत खोज दिखाई दी, यहां लगे लकड़ी के दरवाजे का हथेली बराबर हिस्सा ही गायब हो चुका है, शायद निगम की फाइलों से निकलकर दीमक यहां लग गई होंगी और निगम को पता नहीं चला होगा। फ्लोर और दरवाजे का ये फासला इतना है कि कोई भी शरारती तत्व नीचे झुककर अंदर नजर डाल सकता है, यहां महिलाएं भी आती हैं, तो क्या ये महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के साथ निगम का खिलवाड़ नहीं है।

थोड़ा आगे चलकर एक और कारनामा निगम कार्यालय का दिखा कि यहां पर एक पुरुष शौचालय में ताला लगा हुआ है जैसे वहां निगम का कोई ऐसा खजाना गड़ा हुआ है जिसे 11 मुल्कों के अपराधियों से बचाया जा रहा हो।

अब आते ही निगम कार्यालय की सबसे अद्भुत कारीगरी पर, इसे तो दुनिया के आठवें अजूबे में शामिल किया जाना चाहिए या फिर कोई नोबल पुरस्कार देना चाहिए। क्योंकि काम ही निगम ने ऐसा किया, यहां पर एक टॉयलेट में तो दरवाजा ही नहीं लगा है, ये पूरी तरह से सामने से खुला है, सिर्फ साइड में एक दीवार से मेल यूरिनल से उसे अलग किया गया है। बाकी सामने से पूरा खुला, साथ ही यूरिनल के पास इतनी गंदगी और पान की पीक पड़ी हुई है और सफाई का दूर-दूर तक कोई नाम नहीं।

जरा रुकिए...अभी से निगम को कोसना बंद कीजिए क्योंकि अभी तो एक और चीज दिखानी है, ये जो आप जाली देख रहे हैं ये महिला शौचालय की दीवार पर लगी हुई है, जिसका एक हिस्सा कटा हुआ दिख रहा है। पुरुष शौचालय से लगी इस जाली को किसने और क्यों काटा, क्या निगम की महिला कर्मचारियों ने इसकी शिकायत आज तक नहीं की होगी। महिलाओं की गरिमा को नगर निगम अपने ही आंचल में इस तरह बेआबरु कर रहा है और सब आंखें मूंदे हुए हैं।

अब दिखातें हैं दिव्यांगों के टॉयेलट की हालत, जो इतनी गंदी है कि ऐसा लग रहा है कि वहां पर सालों से सफाई नहीं हुई और तो और दरवाजा भी टूटा हुआ। इसकी किनारी कभी भी नगर निगम के दावों और वादों की तरह बेशर्मी से गिर सकती है। जरा सोचिए कि कैसे कोई इतने गंदे टॉयलेट में जा सकता है, आप ये देखिए इन दरवाजों के कब्जे भी उखड़ चुके हैं, यानी कब ये नगर निगम की हवाई उपलब्धियों से गिरकर अर्श से फर्श पर आ जाएगा पता भी नहीं चलेगा।

एक टॉयलेट का तो गेट ही टूटकर कई सालों से गिरा पड़ा है, और जब उसे हमारी टीम ने उठाकर देखा तो वहां पर निगम कर्मचारियों की दिन-रात की मेहनत नजर आ गई, पान-मसाले के खाली पाउच उनके विकास कार्यों की शोभा जो बढ़ा रहे थे।

सोचिए ये हालत निगम के खुद के कार्यालय की तो आम आदमी पूरे शहर के शौचालयों की व्यवस्था पर क्या उम्मीद लगाएगा, जो कि पहले ही उम्मीदों से नीचे गिर चुके हैं, हमारी टीम की पड़ताल में यहां जो कुछ निकल कर सामने आया, वो आपने देखा और सुना अब इस पर निगम क्या जवाब देता है, कब इन हालातों को सुधारता है। इसका इंतजार रहेगा।

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