सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर स्कूल के बच्चे, गहलोत ने जाकर सुनी समस्या, पायलट ने सरकार को घेरा

जयपुर के राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर स्कूल के बच्चे सड़क पर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। साइन लैंग्वेज में इन छात्रों ने स्कूल की जर्जर इमारत, प्रशिक्षित टीचर्स की कमी समेत कई मूलभूत समस्याओं के समाधान की मांग की है।
मामले प्रकाश में आते ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तुरंत स्कूल पहुंचे और बच्चों से बातचीत की उनकी समस्याएं जानीं। उन्होंने कहा कि 45 साल पहले जब मैं जोधपुर से पहली बार सांसद बना तब मैंने एक संस्था बनाकर वहां गांधी मूक-बधिर स्कूल शुरू किया जो अब कॉलेज बन चुका है इसलिए मैं इनकी समस्याओं को भली भांति समझ सकता हूं।
मैं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांग करता हूं कि एक विशेष टीम भेजकर इन बच्चों की समस्याओं का समाधान करवाएं जिससे ये बच्चे अच्छे से पढ़ाई कर सकें।
पायलट ने सरकार को घेरा
इस पर सचिन पायलट ने पोस्ट किया और कहा कि ये सरकारी की नाकामी का प्रतीक है। उनकी अनदेखी के चलते अगर इन विद्यार्थियों को अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरना पड़े, तो ये बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। ये प्रतिष्ठित स्कूल आज़ादी से पहले स्थापित हुआ था। जिसका गौरवशाली इतिहास और विशेष महत्व रहा है बावजूद इसके इसकी बदहाल स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।
डोटासरा बोले- क्या हाल हो गया है शिक्षा व्यवस्था का
वहीं गोविंद सिंह डोटासरा ने भी कहा कि अगर जो बच्चे सुन नहीं सकते, बोल नहीं सकते, उन्हें भी न्याय के लिए सड़क पर बैठना पड़े, तो समझिए बच्चे मूक-बधिर नहीं है। मूक-बधिर प्रदेश की संवेदनहीन भाजपा सरकार है, जिसका प्रशासन बहरा और व्यवस्था पूरी तरह गूंगी हो चुकी है।
डोटासरा ने कहा कि ये राजस्थान की जनता का दुर्भाग्य है कि मूक-बधिर बच्चों को भी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर धरने पर बैठना पड़ रहा है। आखिर भाजपा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था का क्या हाल कर दिया है?
सरकार जवाब दें..क्या आपकी जिम्मेदारी सिर्फ प्रचार, झूठी बयानबाज़ी करना ही है, या प्रदेश के दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित करना भी है?
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